स्वोपने देखा राजपुत्र जात्रा का किया गया मंचन

Updated at : 10 Feb 2025 6:52 PM (IST)
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स्वोपने देखा राजपुत्र जात्रा का किया गया मंचन

करौं के स्थानीय रानी मंदाकिनी प्लस टू विद्यालय मैदान में जय बाबा धर्मराज बांग्ला जात्रा समिति के तत्वावधान में आयोजित तीन रात्रि बांग्ला जात्रा कोलकाता के बैनर तले बाबली भट्टाचार्य द्वारा रचित स्वोपने देखा राजपुत्र का मंचन किया

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करौं. प्रखंड के रानी मंदाकिनी प्लस टू विद्यालय मैदान में जय बाबा धर्मराज बांग्ला जात्रा समिति के तत्वावधान में आयोजित तीन रात्रि बांग्ला जात्रा के अंतिम दिन रविवार को कोलकाता के बैनर तले बाबली भट्टाचार्य द्वारा रचित स्वोपने देखा राजपुत्र का मंचन किया गया. जिसमें बांग्ला जात्रा जगत के सुपरहिट अभिनेता प्रेमजीत मुखर्जी, खलनायक कुमार शुभ सहित अभिनेत्री अनुष्मिता के अभिनय ने सबका मन मोह लिया. कलाकारों ने इतनी शानदार प्रस्तुति दी कि लोग ठंड के बावजूद देर रात तक जमे रहे. कहानी ग्रामीण परिवेश में पले बढ़े गायक विजय के जीवन यात्रा पर आधारित रहती है. अपनी जीवन यात्रा में उन्हें तरह-तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. बचपन में अपनी मां को खोने के बाद विजय अपनी सौतेली मां के साथ गांव में रहकर ही जीवन-यापन करता है. एक दिन अपनी सौतेली मां के आदेश पर उन्हें मजबूरन गांव छोड़कर कोलकाता के अमीर व्यवसायी के घर उनकी बेटी को संगीत की शिक्षा देने के लिए जाना पड़ता है, जहां व्यवसायी की बेटी सोनाली से उसे प्यार हो जाता है. इस रिश्ते को सोनाली के पिताजी अस्वीकार करते हैं. साथ ही अपनी बेटी के जीवन से गायक विजय को हटाने के लिए कोलकाता के माफिया दुराचारी जयंत पाल से मिलकर कई प्रकार के षड्यंत्र रचते हैं. इस बीच अपने दोस्त का साथ पाकर विजय सोनाली को उसके घर से भगाकर गांव ले आता है और वे गांव के ही मंदिर में शादी कर लेते हैं. इस फैसले से नाराज सोनाली के पिता बहला-फुसलाकर अपने बेटी-दामाद को अपने घर ले आते हैं और खलनायक जयंत पाल से मिलकर नया षड्यंत्र रचते हैं, लेकिन यहां से कहानी तब मोड़ ले लेती है जब खलनायक जयंत पाल सोनाली के पिता की हत्या कर देते है और इसका आरोप गायक विजय पर मढ़ दिया. इसके बाद विजय जेल चले जाता है और सोनाली पागल हो जाती है. सारी घटनाओं के बीच खलनायक जयंत पाल के साथी के रूप में रह रहे निरीक्षण एजेंसी के गुप्तचर सारे घटनाओं का पर्दाफाश करते हैं और विजय जेल से बाहर आता है. बाहर आकर जयंत पाल की हत्या कर देता है और जंगल में जाकर आत्महत्या कर लेता है. मौके पर बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद थे. स्वोपने देखा राजपुत्र के साथ तीन रात्रि बांग्ला जात्रा का समापन

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