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नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मना स्मृति दिवस

Updated at : 18 Aug 2025 9:24 PM (IST)
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नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मना स्मृति दिवस

मधुपुर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में कार्यक्रम

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मधुपुर. शहर के भेड़वा नवाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का स्मृति दिवस मनाया गया. इस दौरान लोगों ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया. वहीं, धनंजय प्रसाद ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्वाधीनता संग्राम के महानायक थे. वे पूरी दुनिया में मनुष्य की गरिमा और उसकी आजादी का परचम लहराने वाले नेता थे. यूं तो आजादी के बाद नेताओं की नयी पौध तेजी से उड़ी, लेकिन नेताजी जैसा जोशो-खरोश, जज्बा व हौसला न किसी में था और न ही आज किसी में दिख रहा है. उनका मानना था कि गुलाम रहना मनुष्य के लिए सबसे बड़ा अभिशाप है और अन्याय के साथ समझौता करना सबसे बड़ा अपराध है. उन्होंने कभी किसी से समझौता नहीं किया. यहां तक उन्होंने गांधी जी के विचार का भी विरोध किया. परंतु उन्होंने ही गांधी को राष्ट्रपिता भी कहा था. विचार में तालमेल नहीं होने पर वो कांग्रेस छोड़कर फारवर्ड ब्लाक की स्थापना किये. देश की आजादी के खातिर उन्होंने विदेश में रहकर आजाद हिन्द फौज का गठन कर अंग्रेजी हुकूमत से लड़ने की तैयारी की और देश की आजादी के खातिर खुद को निछावर कर दिया. उनकी मौत की खबर सुनकर गांधी भी काफी विचलित हो गये थे. उनके अनुयायियों द्वारा यह कहें जाने पर पर की वो आपके विरोधी थे, फिर क्यूं आप परेशान हो रहे हैं. उस पर गांधी जी कि कहना था की सुभाष बाबु जैसा कोई दूसरा देशभक्त मुझे लाकर दिखाओ. ऐसे देशभक्त को भला कैसे बिसराया जा सकता है. उन्हें याद करना लाजिमी है. मौके पर अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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