बिसुवा संक्रांति पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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बिसुवा संक्रांति पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

सारवां में धूमधाम से मनाया गया पहला बैसाख, पर्व पर आस्था और उल्लास की छटा

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सारवां. प्रखंड क्षेत्र में बैसाख माह के प्रथम दिन मनाए जाने वाले बिसुवा संक्रांति पर्व को लेकर गांवों में श्रद्धा, उत्साह और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही ग्रामीण अपने-अपने कुल देवी-देवताओं के साथ मंदिरों में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना में जुटे रहे. इस पावन अवसर पर लोगों ने दही, बेल, दूध और गुड़ से तैयार विशेष शीतल पेय पाना बनाकर भगवान शिव को अर्पित किया. मान्यता के अनुसार इस दिन जल से भरे मिट्टी के कुंभ का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है, जिसे श्रद्धालुओं ने पूरे भाव के साथ निभाया. इसके साथ ही चने से बने सत्तू और दही से तैयार पेय का प्रसाद रूप में सेवन किया गया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे दिन और रात लगभग समान हो जाते हैं. इस खगोलीय परिवर्तन को भी इस पर्व की विशेषता माना जाता है. पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध के दौरान जब भीष्म पितामह कुरुक्षेत्र में बाणों की शय्या पर लेटे हुए थे, तब उन्हें तीव्र प्यास लगी. उनकी इस अवस्था को देखकर अर्जुन ने धरती में बाण चलाया, जिससे मां गंगा की धारा प्रकट हुई और पितामह की प्यास बुझी। इसी कथा से जुड़ी मान्यता है कि इस दिन प्यासे को जल पिलाने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. पर्व के दौरान मंदिरों के बाहर श्रद्धालुओं के बीच पाना और शीतल प्रसाद का वितरण किया गया, जिससे वातावरण में भक्ति के साथ-साथ सेवा और दान की भावना भी देखने को मिली. पूरे क्षेत्र में यह पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और सामूहिक सहभागिता के साथ धूमधाम से मनाया गया.

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Lilanand Jha

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