Jharkhand News: प्यासे रह जाएंगे झारखंड के 35 गांवों के लोग, भयावह है जल जीवन मिशन की स्थिति

Water Crisis In Deoghar
Jharkhand News: देवघर में जल जीवन मिशन योजना की स्थिति बदहाल है. स्थिति ये है कि 35 गांवों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य 40 फीसदी तक भी पूरा नहीं हो पाया है. इस कारण इन गावों के लोगों में पानी का संकट गहराता जा रहा है.
देवघर, अमरनाथ पोद्दार : झारखंड के देवघर जिले में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों की लागत से बनायी जा रही चांदडीह ग्रामीण जलापूर्ति योजना की हालत चिंताजनक बनी हुई है. योजना का उद्देश्य अजय नदी से पानी लिफ्ट कर तीन पंचायत चांदडीह, गौरीपुर और सातर के 35 गांव में स्वच्छ पेयजल पहुंचाना था. लेकिन 2024 की तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी योजना का 40 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया है.
गर्मी में गहराता जा रहा पीने के पानी का संकट
गर्मी में हजारों ग्रामीण के सामने पीने के पानी का संकट गहराता जा रहा है, जबकि योजना के तहत एक भी घर में अब तक जल कनेक्शन नहीं दिया गया है. पेयजल और स्वच्छता विभाग से जल जीवन मिशन के तहत देवघर जिले की चांदडीह जलापूर्ति योजना का काम काफी धीमा है. 23 करोड़ की चांदडीह जलापूर्ति योजना से चांदडीह, गौरीपुर व सातर पंचायत के कुल 3834 घरों में वाटर कनेक्शन देना है. इस योजना में दो जलमीनार बनायी जानी है. जिसमें एक जलमीनार बन चुकी है, जबकि गौरीपुर गांव में दूसरी जलमीनार पूरी तरह फाइनल नहीं हुई है.
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वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम अधूरा
इस प्रोजेक्ट में सबसे महत्वपूर्ण काम वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का है. वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम भी अधूरा है. अभी 60 से 65 फीसदी ही वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम पूरा हो पाया है. ऐसी परिस्थिति में इस गर्मी में भी चांदडीह जलापूर्ति योजना से तीन पंचायत के करीब 35 गांव के लोग पीने के पानी से वंचित रह जाएंगे. कुल 3834 घरों में पानी देने के लक्ष्य में एक भी घर में वाटर कनेक्शन नहीं दिया गया है.
गौरीपुर गांव में अभी भी काम चालू नहीं
गौरीपुर के कई गांव में अभी काम भी चालू नहीं किया गया है. इस प्रोजेक्ट का काम भी कई महीनों से बंद रहने से काम डेटलाइन में पूरा नहीं हो पाया है. विभाग से ठेकेदार को समय पर काम पूरा करने के लिए कई बार नोटिस भी दिया गया है, बावजूद तेजी नहीं आयी है.
पाइप और मैटेरियल की क्वालिटी पर भी उठा सवाल
गौरीपुर में कई महीनों से वाटर सप्लाई का पाइप पड़ा हुआ है. लंबे समय से खुले में पाइप रखे रहने से इसकी क्वालिटी पर भी असर पड़ने लगा है. प्रयोग के लिए लाये गये पाइप की क्वालिटी पर कई लोगों ने सवाल उठाये हैं. वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में ईंट और अन्य मैटेरियल की गुणवत्ता पर भी सवाल पहले उठ चुका है.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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