Deoghar News : मिथिला व बाबाधाम की संस्कृति में सन्निहित है माता पार्वती का चरित्र

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Dec 2024 9:01 PM

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शहर के बिलासी मुहल्ला स्थित मैरेज गार्डेन में 22वें अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसकी शुरुआत पारंपरिक शोभायात्रा के साथ की गयी, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में जाकर यात्रा समाप्त हुई. इसमें अतिथियों ने अपने विचार रखे.

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संवाददाता, देवघर : शहर के बिलासी मुहल्ला स्थित मैरेज गार्डेन में 22वें अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन का आयोजन किया गया. इसकी शुरुआत पारंपरिक शोभायात्रा के साथ की गयी, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में जाकर यात्रा समाप्त हुई. दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र का विधिवत शुभारंभ बाबा मंदिर के सरदार पंडा श्रीश्री गुलाब नंद ओझा, झारखंड के पूर्व मंत्री राज पलिवार, बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी, बैद्यनाथ पंडा कीर्तन मंडली के महामंत्री विनोद दत्त द्वारी, इसीएल के पूर्व जीएम नारायण झा, पूर्व आइजी कपिलदेव प्रसाद सिंह, ओमप्रकाश मिश्र, अशोक मिश्र, नेपाल के प्रतिनिधि राजीव कुमार झा व अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मुख्य अतिथि सरदार पंडा ने कहा कि जगत जननी मां पार्वती का चरित्र मिथिला व बाबाधाम की सांस्कृतिक चेतना की केंद्रीय भावना में सन्निहित है. पूरी दुनिया में अगर हमारी संस्कृति सर्वश्रेष्ठ संस्कृति के रूप में स्थापित है, तो यह भगवान श्रीराम और माता जानकी के साथ ही बाबा बैद्यनाथ व माता पार्वती द्वारा प्रस्तुत आदर्श उदाहरण के कारण ही है. पूर्व मंत्री श्री पलिवार ने कहा कि राम जन्मभूमि पर विशाल मंदिर का निर्माण होना निश्चित रूप से गर्व की बात है, लेकिन यह गौरव तब तक पूर्णता हासिल नहीं कर सकता, जब तक कि मैया सीता की जन्मभूमि का उद्धार नहीं हो जाता. उन्होंने कहा कि सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में स्थित माता सीता की जन्म भूमि के दर्शन के बिना रामलला का दर्शन अधूरा है, क्योंकि बिना सिया के राम स्वयं अधूरे हैं. उन्होंने मां सीता के मातृलिपि मिथिलाक्षर की चर्चा करते हुए उपस्थित जनों से अपने घर का नाम अनिवार्य रूप से मिथिलाक्षर लिपि में लिखने का संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि बिना दैनिक प्रयोग में लाये इस धरोहर लिपि को जीवंत बनाए नहीं रखा जा सकता. उन्होंने मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए अलग मिथिला राज्य के गठन को अपरिहार्य बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बैद्यनाथ पंडा कीर्तन मंडली के महामंत्री श्री द्वारी ने कहा कि माता जानकी के बगैर राम और माता पार्वती के बिना बाबा बैद्यनाथ की कल्पना नहीं की जा सकती. दोनों ने ही जिस मर्यादा को स्थापित किया वह मिथिला की बेटी सीता और पार्वती के सहयोग के बिना संभव नहीं था.

माता सीता की जन्म भूमि पर भी विशाल मंदिर निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान

अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के प्रधान महासचिव डाॅ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि बाबा नगरी देवघर और मिथिला आपस में अत्यंत गहराई से जुड़े हैं. हमारे संबंध अत्यंत प्राचीन होने के साथ-साथ स्वर्णिम परंपरा के साक्षी रहे हैं. उन्होंने उपस्थित पंडा समाज एवं विद्वत जनों से रामलला के साथ माता सीता की जन्म भूमि पर भी विशाल मंदिर निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने के साथ ही मिथिला और देवघर के जन-जन को एक बार फिर से सांस्कृतिक एकता के सूत्र में बांधने में मील का पत्थर साबित होगा. प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने मिथिला को निराकार ब्रह्म को साकार करने वाली धरती बताते हुए इसे कुशल व्यवहार के माध्यम से सभ्यता एवं संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का केंद्र बिंदु बताया. बेनीपुर के विधायक प्रो विनय ने मिथिला भूमि को ज्ञान व प्रेम के समन्वय का जीता जागता प्रमाण बताया.

मिथिला रत्न सम्मान उपाधि से किया गया सम्मानित

कार्यक्रम में पंडा समाज की अद्भुत जुटान के बीच गौरवशाली परंपरा के तहत मिथिला एवं बाबाधाम के बीच सांस्कृतिक सेतु का निर्माण करने वाले करीब दर्जन भर से अधिक लोगों को मिथिला रत्न सम्मान उपाधि से सम्मानित किया गया. इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन के अध्यक्ष डाॅ महेंद्र नारायण राम, मणिकांत झा, नीलम झा, पुरुषोत्तम वत्स, नवल किशोर झा, सुषमा झा, सोनी चौधरी, शंभू नाथ मिश्र, डाॅ दिलीप कुमार झा, डाॅ महानंद ठाकुर, हरि किशोर चौधरी मामा आदि मौजूद रहे.

विद्यापति संगीत समारोह का आयोजन

कार्यक्रम में आकर्षक विद्यापति संगीत समारोह का भी आयोजन किया गया. इसमें पं कुंजबिहारी मिश्र, रामबाबू झा, केदारनाथ कुमर, डा सुषमा झा, सोनी चौधरी, विभा झा, नीतू कुमारी आदि ने भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित दर्शकों का दिल जीता. मौके पर सम्मेलन की स्मारिका ””बैद्यनाथम्”” एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त पीजी हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ रमाकांत झा के कथा काव्य ””दूसरी धरती”” का विमोचन भी किया गया.

हाइलाइट्स

भव्य शोभायात्रा के साथ शुरू हुआ 22 वां अंतरराष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन

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