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आदिवासी की सभ्यता ही सबसे प्राचीन व समृद्ध, इसे सहेजने की जरूरत : एभेन अखाड़ा

Updated at : 09 Aug 2024 8:02 PM (IST)
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आदिवासी की सभ्यता ही सबसे प्राचीन व समृद्ध, इसे सहेजने की जरूरत : एभेन अखाड़ा

विश्व आदिवासी दिवस पर मधुपुर के पसिया में कार्यक्रम आयोजित गया, कार्यक्रम में समाज के प्रबुद्धजनों ने आदिवासियों से जुड़े मसलों पर चर्चा की और समाज की बेहतरी के लिए एकगुट होने का संदेश दिया.

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मधुपुर . प्रखंड के पसिया स्थित बुलाहट संस्था परिसर में आदिवासी एभेन अखाड़ा के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस शुक्रवार को समारोह पूर्वक मनाया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन मधुपुर कॉलेज के शिक्षक प्रो. होरेन हांसदा ने किया. मौके पर अतिथियों ने वीर शहीद बिरसा मुंडा और सिदो-कान्हू की तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित किया. विषय प्रवेश आदिवासी एभेन अखाड़ा के अध्यक्ष भुवनेश्वर कोल ने कहा कि आदिवासी की सभ्यता ही सबसे प्राचीन व समृद्ध है. इसे आदिवासी समुदाय को सहेज कर रखने की जरूरत है. मुख्य अतिथि प्रो. होरेन ने कहा कि आदिवासी दुनिया को बचाने के लिए पैदा हुए हैं. आज आदिवासी के साथ कई मौके पर दुर्व्यवहार की खबरें सुनने को मिलती हैं. आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर आदिवासियों का ही शोषण किया जाता है. कहा कि आदिवासियों की सभ्यता संस्कृति को बचाने के लिए एकजुट होना होगा. पारंपरिक देशी जड़ी बूटी चिकित्सा पद्धति को बचाना है. आज भी आदिवासी के भोजन में औषधि मिश्रित होता है. भारत प्राचीन आदिवासी कोल जाति कल्याण समिति के महामंत्री प्रभु कोल ने कहा नशापान से आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षति होती है, इससे बचना चाहिए. अशोक कुमार गौंड ने कहा कि हमारे बच्चे भी शिक्षित हो रहे है और आगे बढ़ रहे है. कार्यक्रम में मांझी हड़ाम, नायके, परानिक, गोडेत,समाजकर्मी, शिक्षक उपस्थित थे. कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. मारग्रेट, बहामुनी हेम्ब्रम, बेरनादेत तिर्की, ओदिन हांसदा, जुगल बस्की, प्रभु जॉन हांसदा, पद्मिनी मुर्मू, ऊबीलाल मुर्मू, रामविलास सोरेन, जोना मुर्मू, शानु सोरेन, दिनेश बस्की, गब्रियल हांसदा, सोनी मरांडी आदि सक्रिय रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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