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मधुपुर में 10 महीने से ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद, प्रखंडों में भी चालू नहीं हो सका ब्लड स्टोरेज यूनिट

Updated at : 03 Dec 2024 9:25 PM (IST)
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मधुपुर में 10 महीने से ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद, प्रखंडों में भी चालू नहीं हो सका ब्लड स्टोरेज यूनिट

मधुपुर के अनुमंडल अस्पताल में 10 महीने से ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद पड़ी हुई है. ऐेसे में मधुपुर के लोगों को ब्लड के लिए देवघर का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिसमें सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है.

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संवाददाता, देवघर .अनुमंडल अस्पताल मधुपुर में करीब 10 महीने से ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद पड़ी हुई है. ऐसे में मधुपुर के लोगों को ब्लड के लिए फिर से देवघर का चक्कर लगाना पड़ रहा है. इससे में सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं और थैलेसीमिया के मरीजों को हो रही है. ऐसे मरीजों को मधुपुर से देवघर आकर खून लेकर जाना पड़ रहा है. नहीं तो देवघर के अस्पताल में भर्ती कर खून चढ़ाना पड़ रहा है. इससे मधुपुर, करों, तथा मारर्गोमुंडा क्षेत्र के लोगों को परेशानी हो रही है.

यूनिट में लगे मशीन व फ्रीजर खराब

अनुमंडल अस्पताल मधुपुर के उपधीक्षक डाॅ शाहीद ने बताया कि यूनिट में लगी मशीन फरवरी माह से बंद पड़ी हुई है. यूनिट में लगी सभी मशीन करीब 13 साल पूर्व लगा हुए थे, जो लगभग सभी खराब हो चुके हैं. इतना ही नहीं यूनिट में लगा फ्रीजर भी खराब पड़ा हुआ है. इस कारण ब्लड स्टोरेज यूनिट बंद हो गयी है. उन्होंने कहा कि इसे लेकर विभाग को लिखित दिया गया है, साथ ही यूनिट के लिए नये फ्रीजर और अन्य सामग्री की मांग की गयी है, ताकि फिर से चालू हो सके.

किसी भी प्रखंड में नहीं चालू हो सकी ब्लड स्टोरेज यूनिट

स्वास्थ्य विभाग की याेजना थी कि मरीजों को खून के लिए परेशानी नहीं हो, इसके लिए मरीजों को सीएचसी स्तर पर खून मिल जाये, इसके लिए सभी सीएचसी में ब्लड स्टोरेज यूनिट चालू की जानी थी. लेकिन अबतक कहीं भी इसकी शुरूआत नहीं हो सकी है. जबकि सारवां सीएचसी में भी ब्लड स्टोरेज यूनिट के लिए फ्रीजर समेत अन्य समय उपलब्ध थे, लेकिन यहां भी अबतक शुरुआत नहीं हो सकी है. विभाग के अनुसार फ्रीजर भी अब खराब हो गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन जगहों पर स्टोरेज यूनिट की शुरूआत करने को लेकर काई पहल भी नहीं की जा रही है.

रक्त केंद्र में खून की उपब्धता होने से थैलेसीमिया मरीजों को मिलती है राहत

जिले में रक्तदान शिविरों से ब्लड सेंटर में जैसे ही खून की उपलब्धता बढ़ जाती है, वैसे ही थैलेसीमिया मरीजों को बड़ी राहत मिल जाती है. और अन्य दिनों की अपेक्षा जबतक रक्तकेंद्र में खून रहता है. थैलेसीमिया मरीजों की संख्या भी कम नहीं होती है. अन्य दिनों में जहां हर दिन दो से तीन थैलेसीमिया मरीज पहुंचते हैं, रक्त केंद्र में खून के उपलब्ध रहने के बाद ही दिन में पांच से सात मरीज आने लगते है. अन्य दिनों में जिस ग्रुप का खून चाहिए, उन्हें उसी ग्रुप का डोनर लाना पड़ता है. लेकिन रक्त केंद्र में खून उपलब्ध होने के कारण किसी भी व्यक्ति को लाकर डोनेशन करा कर खून लेकर चला जाता है. बीते दिनों हुए ब्लड डोनेशन के बाद 25 नवंबर को 09 थैलेसीमिया मरीज, 26 को सात मरीज, 28 को आठ मरीज, 29 को तीन मरीज, 30 को सात मरीज, एक दिसंबर को चार मरीज, दो दिसंबर को चार मरीज खून लेने पहुंचे थे.

कहते है पदाधिकारी

ब्लड स्टोरेज यूनिट मधुपुर में बंद पड़ी हुई है, फ्रीजर खराब है इसकी भी जानकारी मिली है, जल्द ही दुबारा चालू कराया जायेगा. अन्य जगहों पर भी स्टोरेज यूनिट चालू विभाग की सामग्री की मांग की जायेगी.

डॉ युगल किशोर चौधरी, प्रभारी सिविल सर्जन

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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