कोलियरी विस्थापित भवानीपुर गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं

चितरा कोलियरी के साये में प्यासा भवानीपुर, 700 आबादी आज भी पानी को मोहताज
चितरा. विकास और पुनर्वास के दावों के बावजूद एसपी माइंस चितरा कोलियरी से प्रभावित भवानीपुर गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है. करीब 700 की आबादी वाले इस गांव में अब तक शुद्ध पेयजल की कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो पाई है. स्थिति यह है कि गांव में न तो जलमीनार स्थापित है और न ही एक भी चालू चापानल उपलब्ध है. इस संबंध में ग्रामीण मदन राय, अनीता देवी, निमाय, दयानंद राय, आनंद राय, दामोदर राय और प्रकाश रजक ने बताया कि पानी के लिए दूर जाना पड़ता है और कई बार घंटों इंतजार करना पड़ता है. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रबंधन के वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं. बताया कि खासकर महिलाओं और बच्चों को रोजाना लंबी दूरी तय कर पानी लाना पड़ता है, जिसमें परेशानी होती है. बताया जाता है कि यह गांव कोलियरी के अधिग्रहित क्षेत्र में आता है, जहां खनन कार्य तो जारी है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं अब तक नहीं पहुंच पायी है. ग्रामीणों का कहना है कि इसीएल द्वारा कभी-कभी पानी की आपूर्ति की जाती है, पर वह पेयजल के रूप में उपयोगी नहीं होता. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पानी लाने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी महिलाओं और बच्चों पर है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित होती है. गर्मी के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं, क्योंकि कोलियरी प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला पानी पीने योग्य नहीं होता. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग और कोलियरी प्रबंधन से शिकायत की गयी, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द शुद्ध पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. इस संबंध में मुखिया सुमन देवी ने कहा कि पेयजल की समस्या दूर करने के लिए कोलियरी प्रबंधन को कई बार आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी.
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