शिक्षक नियुक्ति फर्जीवाड़ा : एफआइआर हुए बीत गया एक वर्ष, रेंग रहा है पुलिस का अनुसंधान

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प्रशासनिक जांच में प्रथम दृष्टया डीएसइ कार्यालय के पदाधिकारी, लिपिक मनीष कुमार व संतोष कुमार व अन्य दोषी जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए नगर थाने में दिया 04.05.2016 को दिया था आवेदन जांच टीम ने पचपन पेज के जांच रिपोर्ट में कई चौकाने वाला तथ्यों का किया था खुलासा देवघर : […]

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प्रशासनिक जांच में प्रथम दृष्टया डीएसइ कार्यालय के पदाधिकारी, लिपिक मनीष कुमार व संतोष कुमार व अन्य दोषी
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्राथमिकी दर्ज करने के लिए नगर थाने में दिया 04.05.2016 को दिया था आवेदन
जांच टीम ने पचपन पेज के जांच रिपोर्ट में कई चौकाने वाला तथ्यों का किया था खुलासा
देवघर : देवघर में इंटर प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति में अनियमितता व फर्जीवाड़ा का मामला सामने आने के बाद उपायुक्त के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा 04 मई 2016 को नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. प्राथमिकी दर्ज होने के एक वर्ष बीतने के बाद भी पुलिस का अनुसंधान ठंडे बस्ते में पड़ी है.
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अनुसंधान के लिए मांगे गये सभी दस्तावेज आइओ को उपलब्ध कराने का दावा जिला शिक्षा पदाधिकारी व जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा किया जा रहा है. बावजूद अबतक दोषियों के विरुद्ध पुलिस की ओर से काई कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़ा करता है.
इससे पहले शिक्षक नियुक्ति में अनियमितता एवं फर्जीवाड़ा की शिकायत मिलने के बाद डीडीसी ने दंडाधिकारी की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम द्वारा पूरे मामले की जांच करायी गयी थी. नियुक्ति में घोर अनियमितता एवं फर्जीवाड़ा का खुलासा दंडाधिकारी की रिपोर्ट में हुआ था.
जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के पदाधिकारी सहित लिपिक मनीष कुमार, लिपिक संतोष कुमार व अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. विभागीय जांच के बाद प्रथम चरण में 22 मार्च 2017 को 23 नवनियुक्त शिक्षकों को बरखास्त किया गया था. इसमें 18 नवनियुक्त शिक्षकों का टेट प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया था. फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षकों का नाम प्राथमिकी में दर्ज करने के लिए नगर थाना से जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा अनुरोध किया गया था.
प्रथम चरण में 23 नवनियुक्त शिक्षक किये गये थे बरखास्त
शिक्षक नियुक्ति में अनियमितता एवं फर्जीवाड़ा मामले में देवघर में 23 नवनियुक्त शिक्षकों को बरखास्त किया गया था. बरखास्तगी के संबंध में जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा आदेश भी जारी कर दिया गया था. इसमें नवनियुक्त 18 शिक्षकों का टेट प्रमाण पत्र सत्यापन में फर्जी मिला था. चार नवनियुक्त शिक्षकों का ऐसे संस्थान से शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र जारी किया गया था. जिसकी मान्यता नहीं थी. एक नवनियुक्त शिक्षक का चयन कम अंक के आधार पर किया गया था.
दूसरे चरण में गैर पारा कोटि के 14 नवनियुक्त शिक्षक हुए थे बरखास्त
जिला शिक्षा स्थापना समिति की बैठक में निर्णय के बाद पारा से गैर पारा कोटि में चयनित नवनियुक्त 14 शिक्षकों को बरखास्त कर दिया गया. समिति ने माना था कि बरखास्त नवनियुक्त शिक्षकों ने आवेदन के अंतिम तिथि के बाद पारा शिक्षक के पद से इस्तीफा दिया था.
बरखास्त किये गये नवनियुक्त शिक्षकों में सारठ प्रखंड के दो, मधुपुर प्रखंड के दो, सारवां व सोनारायठाढ़ी प्रखंड के पांच एवं मारगोमुंडा प्रखंड के पांच शिक्षक शामिल हैं. बरखास्त शिक्षकों को कार्य अवधि का वेतन का भुगतान करने का निर्णय भी स्थापना समिति की बैठक में लिया गया था.
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