मरीज बढ़े पर नहीं बढ़ी डॉक्टरों की संख्या, कैसे होगा इलाज
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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अव्यवस्था. दूसरी जगह प्रतिनियुक्ति पर हैं चिकित्सक, वेतन ले रहे मधुपुर से संसाधन उपलब्ध रहने के बाद भी यदि चिकित्सकों के नहीं रहने के कारण यदि मरीजों का समय पर इलाज नहीं हो तो व्यवस्था की इससे बड़ी नाकामी कुछ नहीं कही जा सकती. मधुपुर : मधुपुर अनुमंडलीय अस्पताल में पिछले कुछ वर्षों से काफी […]
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अव्यवस्था. दूसरी जगह प्रतिनियुक्ति पर हैं चिकित्सक, वेतन ले रहे मधुपुर से
संसाधन उपलब्ध रहने के बाद भी यदि चिकित्सकों के नहीं रहने के कारण यदि मरीजों का समय पर इलाज नहीं हो तो व्यवस्था की इससे बड़ी नाकामी कुछ नहीं कही जा सकती.
मधुपुर : मधुपुर अनुमंडलीय अस्पताल में पिछले कुछ वर्षों से काफी संसाधन दिया गया है. अस्पताल में 92 तरह की दवा उपलब्ध है. जिसमें कई जीवन रक्षक व महंगी दवा शामिल है. दवा व जांच की उपलब्धता होने के बाद मरीजों को लगा कि उन्हें इलाज में परेशानी नहीं होगी. दिनों दिन मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. मरीजों ने सरकारी अस्पताल की ओर रूख करना भी शुरू कर दिया है. लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण सरकार का स्वास्थ्य सेवा बेहतर बनाने का संकल्प कहीं पीछे छूटता जा रहा है.
दवा व संसाधन रहने पर भी इलाज का संक
सात चिकित्सक हैं प्रतिनियुक्ति पर
अस्पताल स्वास्थ्य सुविधा बेहतर करने के लिए सरकार ने कई विशेषज्ञ चिकित्सकों का पदस्थापन किया. लेकिन इनकी प्रतिनियुक्ति दूसरी जगह कर दी गयी है या फिर सुविधा के हिसाब से इन्होंने करा रखा है और वेतन मधुपुर से ले रहे हैं.
इनमें डा विकास, डा दिवाकार पासवान, डा मनीष लाल व महिला रोग विशेषज्ञ डा परमजीत कौर देवघर में प्रतिनियुक्ति पर है. वहीं एक अन्य महिला चिकित्सक डा एनी एलिजाबेथ व डा लियाकत अंसारी पालोजोरी में प्रतिनियुक्ति पर हैं. इनमें कई चिकित्सक ऐसे हैं जो प्रतिनियुक्ति वाले जगह में वर्षों पूर्व से भी अपना निजी क्लिनिक चला रहे हैं.
अबतक पदस्थापित नहीं हो सके हैं महिला व शिशु चिकित्सक
अनुमंडलीय अस्पताल में इलाज कराने के लिए महिला व शिशु मरीजों की संख्या भी बढ़ी है. लेकिन अस्पताल में एक भी महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है. एएनएम के भरोसे महिलाओं का प्रसव होता है. इतना ही नहीं अस्पताल में एमटीसी सेंटर चल रहा है. जिसमें कुपोषित बच्चे का इलाज किया जाता है. लेकिन कोई शिशु रोग विशेषज्ञ अस्पताल में नहीं है. अनुमंडलीय अस्पताल में फिलहाल डा सुनील मरांडी उपाधीक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं. डा कलावरी उरांव, डा मनोज, डा शाहिद, दंत चिकित्सक डा नीलकमल के अलावे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अायुष चिकित्सक डा दिवाकांत पंकज ही कार्यरत हैं. जो रोगियों की संख्या व विशेषज्ञ चिकित्सक के हिसाब से काफी कम है.
कहते हैं प्रभारी
अस्पताल में रोगी की संख्या नियमित रूप से बढ़ रही है. शिशु और महिला रोग विशेषज्ञ नहीं है. जिससे परेशानी बढ़ी है. अस्पताल के सात चिकित्सक अलग-अलग जगहों पर प्रतिनियुक्ति पर है.
डा सुनील मरांडी, अस्पताल प्रभारी
प्रतिनियोजन टूटेगा : मंत्री
अनुमंडलीय अस्पताल में रोगियों की संख्या बढ़ रही है. अस्पताल के सात चिकित्सक प्रतिनियुक्ति पर हैं. इन सभी का प्रतिनियोजन तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सचिव को पत्र लिखा है.
राज पलिवार, श्रम नियोजन मंत्री
सुविधा व संसाधन बढ़े
अस्पताल में एक्स रे, खून जांच, बलगम जांच समेत विभिन्न रोगों की जांच की सुविधा उपलब्ध है. इसके अलावे अल्ट्रासाउंड मशीन भी उपलब्ध है. लेकिन चिकित्सक के अभाव में चल नहीं पा रहा है. साथ ही कुल 92 तरह की दवा है. जिनमें ओपीडी में 44 महत्वपूर्ण दवा है. इन दवाओं में सर्प दंश का एनटी वेनम, कुत्ता काटने का एंटी रेबिज समेत डेक्सोना, ट्रेमाडॉन, सेपट्रामजॉन, जिटोक्सिन, मेनिटॉल, ओमेप्राजॉन जैसे कीमती और जीवन रक्षक दवा भी शामिल है.
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