हाइफ्लो ऑक्सीजन थेरेपी से कम खर्च में नवजात का इलाज संभव

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आयोजन. द्वितीय राज्यस्तरीय कांफ्रेंस ‘न्यूकॉन-2017’ शुरू सरकार सहयोग करे तो सरकारी अस्पतालों में होने वाले खर्च से कम राशि पर दे सकते हैं सेवा हाइफ्लो ऑक्सीजन थैरेपी के जरिये वेंटीलेटर की अपेक्षा कम खर्च में नवजात का इलाज संभव नवजात के उपचार की जितनी सुविधा कम खर्च पर बिहार-झारखंड में उपलब्ध है, उतना देशभर में […]

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आयोजन. द्वितीय राज्यस्तरीय कांफ्रेंस ‘न्यूकॉन-2017’ शुरू

सरकार सहयोग करे तो सरकारी अस्पतालों में होने वाले खर्च से कम राशि पर दे सकते हैं सेवा
हाइफ्लो ऑक्सीजन थैरेपी के जरिये वेंटीलेटर की अपेक्षा कम खर्च में नवजात का इलाज संभव
नवजात के उपचार की जितनी सुविधा कम खर्च पर बिहार-झारखंड में उपलब्ध है, उतना देशभर में कहीं नहीं
नवजात के उपचार में हो रहे बदलाव व तकनीक पर हुआ विचार-विमर्श
देवघर : द्वितीय झारखंड न्यूकॉन 2017 के तहत शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों का दो दिवसीय कांफ्रेंस सेंट्रल प्लाजा के सभागार में शुरू हुआ. कांफ्रेंस का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ एससी झा सहित झारखंड की पहली नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ बीआर मास्टर, स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ मंजू बैंकर और डॉ अर्पिता गांधी ने संयुक्त रुप से किया. कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएस डॉ झा ने कहा कि बाबाधाम में राज्यस्तरीय कांफ्रेंस का आयोजन गौरव की बात है. इससे यहां के डॉक्टरों को लाभ मिलेगा. कांफ्रेंस में जानकारी लेकर डॉक्टर समाज को लाभान्वित करेंगे. डॉ बीआर मास्टर ने कहा कि नवजात को 28 दिनों तक खतरे की संभावना रहती है.
कांफ्रेंस का मूल उद्देश्य नवजात के उपचार में हो रहे बदलाव की जानकारी शेयर करना है. तकनीकी दृष्टिकोण से नवजात के उपचार में जो परिवर्तन हुए हैं, उसे आपस में विचार-विमर्श कर जानकारी देना है. उम्मीद है कि कांफ्रेंस बाबानगरी में सफल होगा. स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ मंजू बैंकर ने कहा कि कांफ्रेंस का लाभ स्थानीय व संताल के डॉक्टरों को मिले ताकि आने वाले समय में कम खर्च पर यहां के लोगों को नवजात की चिकित्सा उपलब्ध करा सकें. डॉ अर्पिता गांधी ने कहा कि बाबा नगरी में ऐसा आयोजन बड़ी बात है. उम्मीद है कि इस कांफ्रेंस का संदेश पूरे झारखंड तक पहुंचे. कांफ्रेंस के साइंटिफिक सत्र का उद्घाटन डॉ अजय गंभीर ने किया. कांफ्रेंस में पहुंचे झारखंड, पश्चिम बंगाल व बिहार के डॉक्टरों ने व्याख्यान दिये.
एनएनएफ के झारखंड सचिव रांची के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश कुमार ने बताया कि कांफ्रेंस में नवजात के सिर में ब्लीडिंग, सांस में होने वाली तकलीफ आदि पर चर्चा की गयी. उन्होंने कहा कि हाइफ्लो ऑक्सीजन थैरेपी के जरिये वेंटीलेटर की अपेक्षा कम खर्च में नवजात का इलाज संभव है. इस पद्धति को उन्होंने प्रयाेग में लाया, जिसे आज के दौर में कई शिशु रोग विशेषज्ञ अपना रहे हैं. पहला कांफ्रेंस रांची में हुआ था, वहीं दूसरा कांफ्रेंस देवघर में हो रहा है. कांफ्रेंस में दिल्ली, कोलकाता, बिहार व झारखंड के 35 शिशु रोग विशेषज्ञ वक्ता शामिल हुए हैं, जबकि 100 डेलीगेट्स शिशु रोग डॉक्टर शामिल होने पहुंचे हैं.
पटना के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ श्रवण कुमार ने कहा कि शिशु के उपचार की जितनी सुविधा कम खर्च पर बिहार-झारखंड में उपलब्ध है, उतना देशभर में कहीं नहीं है. सरकार सहयोग करे तो सरकारी अस्पतालों में होने वाले खर्च से कम राशि पर वे लोग सेवा दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि कांफ्रेंस के दूसरे दिन नवजात के इंफेक्शन, बचाव व कम खर्च में इलाज पर विचार-विमर्श होगा.
कांफ्रेंस में विभिन्न दवा कंपनियों द्वारा स्टॉल भी लगाये गये हैं. इस अवसर पर डॉ सरोज कुमार, डॉ एनआर नारायण, डॉ नरेश पंडित, आयोजक सचिव डॉ एस ठाकुर, आइएमए सचिव सह शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ शत्रुघ्न सिंह, डॉ आरके चौरसिया, डॉ राजेश प्रसाद, डॉ रमण कुमार, डॉ एके अनुज, डॉ प्रेम प्रकाश व अन्य मौजूद थे.
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