कर्जधारक नहीं लौटा रहे " 533 करोड़
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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संताल में बढ़ रही है एनपीए की रकम, बढ़ी बैंकों की परेशानी दुमका में 87 व गोड्डा का एनपीए 86 करोड़ सबसे कम एनपीए पाकुड़ में, मात्र 40 करोड़ देवघर : संताल परगना के बैंक एनपीए (नन परफॉर्मिंग एसेट) से परेशान हैं. क्योंकि बैंकों ने सितंबर 2015 तक जो ऋणधारकों को लोन दिया है, वे […]
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संताल में बढ़ रही है एनपीए की रकम, बढ़ी बैंकों की परेशानी
दुमका में 87 व गोड्डा का एनपीए 86 करोड़
सबसे कम एनपीए पाकुड़ में, मात्र 40 करोड़
देवघर : संताल परगना के बैंक एनपीए (नन परफॉर्मिंग एसेट) से परेशान हैं. क्योंकि बैंकों ने सितंबर 2015 तक जो ऋणधारकों को लोन दिया है, वे लौटा नहीं रहे हैं. आंकड़े के मुताबिक संताल परगना के विभिन्न बैंकों के तकरीबन 533 करोड़ रुपये एनपीए में बदल गये हैं. यह खुलासा स्टेट लेबल बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की रिपोर्ट से हुआ है. यानी यह रकम कर्जधारकों के पास फंस गयी है, जो बैंकों को लौटायी नहीं जा रही. सितंबर 2014 के मुकाबले एनपीए की इस रकम में वृद्धि हुई है.
गैर प्राथमिकता वाले क्षेत्र(कृषि व अन्य को छोड़कर) का इसमें सबसे बड़ा योगदान है. इस सेक्टर के एनपीए सितंबर 2014 की तुलना में तकरीबन 30 फीसदी का इजाफा हुआ है. प्राथमिकता वाले क्षेत्र में यह वृद्धि लगभग 19 फीसदी है. वहीं अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र वाले आवासीय, एजुकेशन लोन व गरीब तबके को लोन सहित कृषि उद्योग के क्षेत्र में लगभग 10 फीसदी व सूक्ष्म व लघु उद्योग के क्षेत्र में एनपीए की रकम तकरीबन 5.05 की वृद्धि हुई है.
बैंकों का सबसे अधिक पैसा देवघर में डूबा
रिपोर्ट के अनुसार बैंकों का सबसे अधिक पैसा देवघर में डूबा है. अकेले देवघर में 185.85 करोड़ रुपये एनपीए में बदल गये हैं. इसके बाद दुमका में 87 करोड़, गोड्डा में 86 करोड़ फंसा हुआ है. संताल में सबसे कम पाकुड़ में एनपीए की राशि मात्र 40 करोड़ ही है.
किस जिले में कितना एनपीए
जिला एनपीए की रकम
देवघर 185.85 करोड़
दुमका 87.00 करोड़
गोड्डा 86.00 करोड़
जामताड़ा 69.02 करोड़
साहेबगंज 65.02 करोड़
पाकुड़ 40.01 करोड़
एनपीए बढ़ने से बैंकों व संताल को हो रहा नुकसान
बताया जाता है कि एनपीए का बढ़ना बैंकों सहित किसी भी क्षेत्र की आर्थिक सेहत के लिए खराब है. झारखंड के कुल बकाये का 41 फीसदी हिस्सा सूक्ष्म व लघु उद्योग का है. वहीं गैर प्राथमिकता क्षेत्र(कृषि व अन्य को छोड़) का हिस्सा 25 फीसदी तथा कृषि क्षेत्र का एनपीए में हिस्सा करीब 20 फीसदी है.
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