जरमुंडी में खुलेगा पी-4 स्टेशन

Published at :09 Sep 2013 3:50 AM (IST)
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जरमुंडी में खुलेगा पी-4 स्टेशन

– संजीत मंडल – देवघर : संतालपरगना के गोड्डा में एक ओर जहां मेगा सिल्क कलस्टर की स्थापना हो रहा है, वहीं सिल्क के उत्पादन के लिए रेशम के कीड़े पालने का प्रशिक्षण देने के लिए दुमका जिले के जरमुंडी में भारत का इकलौता पी-4 स्टेशन खुलेगा. संतालपरगना के रेशम के कारीगरों को अब प्रशिक्षण […]

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– संजीत मंडल –

देवघर : संतालपरगना के गोड्डा में एक ओर जहां मेगा सिल्क कलस्टर की स्थापना हो रहा है, वहीं सिल्क के उत्पादन के लिए रेशम के कीड़े पालने का प्रशिक्षण देने के लिए दुमका जिले के जरमुंडी में भारत का इकलौता पी-4 स्टेशन खुलेगा.

संतालपरगना के रेशम के कारीगरों को अब प्रशिक्षण और बाजार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. यह पी-4 स्टेशन रेशम के कीड़े का उत्पादन रिसर्च सेंटर होगा.

जिसमें रेशम कीट पालन के एक्सपर्ट रहेंगे. रेशम उत्पादन के काम में संतालपरगना की अधिकांश महिलाएं लगी हैं.

इसलिए इस पी-4 स्टेशन से पुरुष कारीगरों के अलावा विशेष तौर पर पांच सौ से एक हजार महिलाएं जुड़ेंगी. इन लोगों को ये एक्सपर्ट प्रशिक्षण देकर दक्ष बनायेंगे. ताकि उच्च क्वालिटी का रेशम उत्पादन कर भारत और विश्व के बाजार में कंपीट कर सकें. इसके लिए जरमुंडी में पी-4 स्टेशन के लिए भवन बन कर तैयार है. इस प्रोजेक्ट का संचालन केंद्रीय कपड़ा मंत्रलय और झारक्राफ्ट करेगी. पी-4 स्टेशन के प्रोजेक्ट पर तकरीबन 10 से 12 करोड़ रुपये की लागत आयेगी. इससे संतालपरगना के तसर कारीगरों को रोजगार मिलेगा.

एक्सपर्ट देंगे रेशम कीट पालन का प्रशिक्षण : पी-4 स्टेशन में इस व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं को रिसर्च एक्सपर्ट रेशम कीट पालन का प्रशिक्षण देंगे. एक्सपर्ट बतायेंगे कि किस तरह के पेड़ में रेशम की कीड़े लगेंगे, कीड़े तरह के होंगे, कैसी जलवायु में रेशम के कीड़ों का विकास होगा.

क्योंकि अभी तक परंपरागत पद्धति से यहां के लोग रेशम के कीट का पालन कर रहे हैं जो कारगर नहीं है. हालात ये हैं कि भारत चीन और कोरिया जैसे देशों से रेशम के धागे का आयात कर रहा है.

..तो रेशम के कीड़े उत्पादन का हब बनेगा संतालपरगनां

इस योजना के तहत जब प्रशिक्षण लेकर रेशम के कीड़े का व्यापक पैमाने पर उत्पादन होगा. तो हैदराबाद, बेंगलुरु, असम, मद्रास, उत्तरप्रदेश और जहांजहां सिल्क का उत्पादन होगा है, यहां से रेशम कीट निर्यात किया जायेगा. इस तरह से झारखंड खासकर संतालपरगना रेशम कीट के एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित होगा. साथ ही संतालपरगना के तसर व्यवस्था से जुड़े लोगों को रोजगार मिलेगा.

रेशम कीट उत्पादन का हब बनेगा संताल

– केंद्रीय कपड़ा मंत्रलय झारक्राफ्ट की संयुक्त योजना

– प्रोजेक्ट पर 10 से 12 करोड़ आयेगी लागत

– जरमुंडी में भवन बन कर तैयार

रेशम के कीट पालन के एक्सपर्ट रहेंगे स्टेशन में

पी-4 स्टेशन रेशम कीट रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर के रूप में करेगा काम

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