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यौन शोषण मामले में हाइकोर्ट से जवाहर व अशोक हुए बरी, लोअर कोर्ट ने दी थी सजा, हाइकोर्ट ने कर दिया निरस्त

Updated at : 27 Nov 2018 5:33 AM (IST)
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यौन शोषण मामले में हाइकोर्ट से जवाहर व अशोक हुए बरी, लोअर कोर्ट ने दी थी सजा, हाइकोर्ट ने कर दिया निरस्त

देवघर : तत्कालीन जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी जवाहर सिंह उर्फ जवाहर कुमार व तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी अशोक प्रसाद यौन शोषण मामले में हाइकोर्ट रांची से बरी हो गये हैं. एडिशनल सेशन जज तीन देवघर द्वारा आरोपित द्वय को सात साल की सजा सुनायी थी व प्रत्येक को 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया था. […]

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देवघर : तत्कालीन जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी जवाहर सिंह उर्फ जवाहर कुमार व तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी अशोक प्रसाद यौन शोषण मामले में हाइकोर्ट रांची से बरी हो गये हैं. एडिशनल सेशन जज तीन देवघर द्वारा आरोपित द्वय को सात साल की सजा सुनायी थी व प्रत्येक को 30 हजार रुपये जुर्माना लगाया था.
सजा पाने के बाद आरोपितों ने हाइकोर्ट में अलग-अलग अपील दायर की थी. इन दोनों की ओर से दाखिल क्रिमिनल अपील की सुनवाई जस्टिस अनिल कुमार चौधरी के बेंच द्वारा की गयी. पश्चात इस मामले में इन दोनों को आरोपों से राहत दे दी गयी. यह मामला देवघर की रहने वाली एक युवती ने दर्ज कराया था जिसमें नौकरी का झांसा देकर यौन शोषण करने का आरोप लगाया था.
पीड़िता के बयान पर यह मामला तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर नगर थाना में घटना के दो साल बाद दर्ज हुआ था व पुलिस ने फौरी कार्रवाई करते हुए आरोपितों को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने अनुसंधान के बाद आरोप पत्र दाखिल किया. पश्चात केस को सेशन ट्रायल के लिए भेजा गया जहां पर त्वरित सुनवाई की गयी व दोषी करार दिया गया था.
आरोपित द्वय को हाइकोर्ट ने आरोपों से मुक्त कर दिया. साथ ही सेशन कोर्ट के फैसले को विधि के अनुरूप इंपजन्ड ऑर्डर करार देते हुए निरस्त कर दिया. सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से अनिल कुमार वरीय अधिवक्ता व जितेंद्र एस सिंह ने पक्ष रखा जबकि स्टेट की ओर से विजय कुमार रॉय ने पक्ष रखा था.
क्या था मामला
नगर थाना क्षेत्र के एक मुहल्ले की रहने वाली युवती ने नगर थाना में मुकदमा दर्ज कराया था. इस केस में धारा 376 में 29 सितंबर 2016 को दोषी करार दिया गया था व सजा 5 अक्तूबर 2016 को सुनाई गयी थी. दर्ज एफआइआर में कहा गया था कि कोल्ड ड्रिंक्स में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया व अश्लील तस्वीर खींच कर लगातार यौन शोषण करते रहा था.
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने दोनों के विरुद्ध कार्रवाई की थी. हाइकोर्ट में अपील की सुनवाई चली व 21 अगस्त को फैसला सुनाया गया, लेकिन तीन माह से अधिक समय बीतने के बाद रिहा होने वाले आरोपित द्वय की ओर से सार्वजनिक की गयी.
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