धार्मिक यात्रा में भक्ति ही खत्म हो गयी : मुरारी मोहन द्वारी

Updated at : 12 Aug 2018 4:36 AM (IST)
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धार्मिक यात्रा में भक्ति ही खत्म हो गयी : मुरारी मोहन द्वारी

देवघर : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मास का महत्व बढ़ रहा है. भक्तों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन भक्तों में भक्ति भावना का अभाव हो रहा है. यह धार्मिक यात्रा से धार्मिक मेला के रूप में प्रसिद्धि पाने लगी है. सरकार भी धार्मिक यात्रा से अधिक श्रावणी मेला के रूप में प्रचारित […]

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देवघर : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मास का महत्व बढ़ रहा है. भक्तों की संख्या में भी बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन भक्तों में भक्ति भावना का अभाव हो रहा है. यह धार्मिक यात्रा से धार्मिक मेला के रूप में प्रसिद्धि पाने लगी है. सरकार भी धार्मिक यात्रा से अधिक श्रावणी मेला के रूप में प्रचारित कर रही है. पहले भक्तों की संख्या कम थी. भक्ति व श्रद्धा का प्रमुख था. भक्त कांवर लेकर सीधे पंडा के आवास पर आते थे. अपने साथ बहू-बेटी व पत्नी को लेकर आते थे. अपने पंडा से ही निर्देशित होते थे. पंडा को बाबा का माध्यम मानते थे. पंडा के मना कर देने पर किसी भी हालत में काम नहीं करते थे. अब युवाओं की टोली आने लगी है. इतना ही नहीं मोटरसाइकिल से जल लाने का फैशन चल पड़ा है. बाबा पर जलार्पण के बाद बाबा की भक्ति गायब हो जाती है.

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