फिर नाले में मिला नवजात का शव
Updated at : 25 May 2018 4:26 AM (IST)
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देवघर : शहर में पिछले कुछ दिनों से मृत नवजात को फेंकने की घटनाएं सामने आ रही है. कभी झाड़ियों में तो कभी कूड़ेदान में या फिर कभी किसी नाले में नवजात का शव मिल रहा है. यह अमानवीय कृत्य समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है. गुरुवार को भी बाइपास रोड पुरनदाहा […]
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देवघर : शहर में पिछले कुछ दिनों से मृत नवजात को फेंकने की घटनाएं सामने आ रही है. कभी झाड़ियों में तो कभी कूड़ेदान में या फिर कभी किसी नाले में नवजात का शव मिल रहा है. यह अमानवीय कृत्य समाज के लिए चिंता का विषय बन गया है. गुरुवार को भी बाइपास रोड पुरनदाहा स्थित जमुनाजोर पुल के नीचे फिर एक मृत नवजात बच्ची को फेंक दिया गया.
नवजात बच्ची का शव नाले के गंदे पानी में तैर रहा था, जो पत्थरों के बीच अटका हुआ था. इस पर नजर पड़ते ही मुहल्ले के एक व्यक्ति ने नगर थाना प्रभारी के मोबाइल पर घटना की जानकारी दी. इसके बाद नगर थाने के ओडी पुलिस पदाधिकारी एएसआइ प्रमोद सिंह व पीएन पाल गश्ती दल के साथ वहां पहुंचे. बच्ची के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
मृत नवजात के हाथ में वेनफ्लाम व मुंह में पाइप लगा था. इससे प्रतीत होता है कि जन्म के बाद उसे किसी क्लिनिक में इलाज भी कराया गया. इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गयी, तो दफनाने के बजाय उसे खुले नाले में फेंक दिया गया. पुलिस के अनुसार यह करतूत किसी क्लिनिक वाले की हो सकती है. मामले की जांच में नगर पुलिस जुट गयी है.
डेढ़ माह के अंदर तीसरी घटना
नौ अप्रैल को भी इसी पुल के समीप सड़क किनारे एक झाड़ी के अंदर छिपाकर किसी ने एक कार्टून के अंदर डाल कर मृत नवजात बच्ची को फेंक दिया था. 16 मई को वीआइपी चौक के समीप कूड़ेदान में भी नवजात का शव मिला था. दोनों मामलों में नगर थाने में एफआइआर दर्ज है. अब तक पुलिस यह पता नहीं कर सकी है कि कब और किसने मृत नवजात को इस तरह से फेंका.
फेंके गये नवजातों को मिले कानूनी संरक्षण
नवजात शिशुओं पर काम करने वाली रांची की संस्था पा-लो-ना ने अपने फेसबुक पेज के जरिये देवघर में मिल रहे मृत नवजात को लेकर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है. लिखा है कि नवजात शिशुओं के शवों को दफनाना तो सही है, लेकिन गंदे पानी में बहाना उचित नहीं. बहाने से बच्चे, जानवरों का शिकार बन सकते हैं.
इन अमानवीय परंपराओं पर अब तक नहीं सोचा गया. उन्हें अब चिह्नित किया जाना बहुत ज़रूरी है. अगर लोगों को बताया जाए, उन्हें दिखाया जाए और उन्हें दफनाने के लिए भी सरकारी स्तर पर व्यवस्था उपलब्ध करवाई जाए तो वास्तविक मौत वाले मामलों में नन्हे शवों की दुर्गति होने से बचाया जा सकेगा. इसके अलावा बच्चों के अंतिम संस्कार का कार्य चोरी छुपे नहीं होना चाहिए, यह आइपीसी 318 के तहत अपराध है. संवेदनशील और सक्रिय प्रयासों से ही इन्हें रोका जा सकेगा.
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