मधुपुर अनुमंडल के बंदी नये जेल में होंगे शिफ्ट

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21 करोड़ की लागत से नौ वर्ष बाद मधुपुर में उपकारा बनकर तैयार तीन सौ पुरुष व 50 महिला बंदियों की है क्षमता मधुपुर : देवघर मंडल कारा से रोजाना बंदियों को अब मधुपुर कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा. क्योंकि जल्द ही मधुपुर अनुमंडल क्षेत्र के जितने भी बंदी देवघर मंडल कारा में बंद हैं, सभी […]

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21 करोड़ की लागत से नौ वर्ष बाद मधुपुर में उपकारा बनकर तैयार

तीन सौ पुरुष व 50 महिला बंदियों की है क्षमता
मधुपुर : देवघर मंडल कारा से रोजाना बंदियों को अब मधुपुर कोर्ट नहीं जाना पड़ेगा. क्योंकि जल्द ही मधुपुर अनुमंडल क्षेत्र के जितने भी बंदी देवघर मंडल कारा में बंद हैं, सभी को मधुपुर के चेतनारी में बने नये उपकारा में शिफ्ट किया जायेगा. नये जेल भवन के बन जाने से पुलिस प्रशासन को राहत मिलेगी. हर दिन वैन में भरकर पेशी के लिए बंदियों को मधुपुर कोर्ट जाना पड़ता है. इस कारण पुलिस रिस्क कवर करना पड़ रहा है. ऐसे में जल्द ही इस ड्यूटी से जेल प्रशासन को छुटकारा मिलने वाला है.
2009 में शुरू हुआ था निर्माण : मधुपुर में निर्मित नये जेल भवन पर लागत 21 करोड़ की लागत आयी है. ठेकेदारी व विभागीय पेच के कारण इस जेल को बनने में नौ साल लग गये हैं. आखिरकार जेल बनकर तैयार हो गया है. अगले माह संवेदक द्वारा विभाग को सुपुर्द किया जायेगा. चेतनारी में उपकारा का निर्माण कार्य वर्ष 2009 में साढ़े सात करोड़ की लागत से शुरू हुआ था. तकरीबन 10 प्रतिशत काम होने के बाद संवेदक ने काम छोड़ दिया था. उसके बाद लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2016 में दोबारा निविदा निकाली गयी. अब काम पूरा हो पाया है. उपकारा के साथ ही जेल अधीक्षक, चिकित्सक, पुलिस कर्मी व अधिकारी के लिए भी क्वार्टर बनाये गये हैं. जो पूर्व में ही बनकर तैयार हो चुके हैं.
क्या-क्या हैं सुविधाएं : मधुपुर उपकारा की क्षमता 350 कैदियों की है. इनमें 300 पुरुष व 50 महिला बंदियों के रहने की व्यवस्था है. पुरुषों के लिए आठ व महिलाओं के लिए दो सेल बनाये गये हैं. इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्र, पुस्तकालय, किचन, 65 शौचालय, फिडिंग प्लेटफॉर्म, महिला व पुरुष के लिए सिलाई सेंटर व वर्कशॉप भी बनाये गये है.
कम्युनिटी हॉल, पुलिस बैरक, दो गोदाम, प्रशासनिक भवन, चार वॉच टावर, दो ए व बी टाइप के क्वार्टर की भी सुविधा है. जेल के बनकर तैयार होने के बाद अब देवघर कारा से मधुपुर व्यवहार न्यायालय प्रतिदिन सुनवाई के लिए कैदियों को लाना ले जाना नहीं पड़ेगा. इससे प्रत्येक माह विभाग को लाखों का डीजल बचेगा और सुरक्षा के ख्याल से भी बेहतर विकल्प होगा.
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