टूट गया 16 गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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सारठ: लगभग 15 करोड़ की चितरा जलापूर्ति योजना की स्वीकृति मिलने से आसपास के 16 गांवों के ग्रामीणों को लगा था कि योजना निर्धारित अवधि मे पूरी होगी व समय पर उन्हें शुद्ध पेयजल मिलेगा. लेकिन शुरू से ही निर्माण कार्य में विवाद हो गया. योजना की स्वीकृति तत्कालीन विधायक सह स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता […]
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सारठ: लगभग 15 करोड़ की चितरा जलापूर्ति योजना की स्वीकृति मिलने से आसपास के 16 गांवों के ग्रामीणों को लगा था कि योजना निर्धारित अवधि मे पूरी होगी व समय पर उन्हें शुद्ध पेयजल मिलेगा. लेकिन शुरू से ही निर्माण कार्य में विवाद हो गया. योजना की स्वीकृति तत्कालीन विधायक सह स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता की पहल पर मिली थी, लेकिन विभागीय पेच के कारण इसके शुरू होने में विलंब हो गया.
योजना का इंटकवेल, फिल्टरेशन प्लांट व जलमीनार बन कर तैयार हैं. पाइप भी बिछायी जा रही है. इंटकवेल से फिल्टरेशन प्लांट तक पानी चालू भी था. इसके घ्वस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खुल गयी. स्थानीय लोगों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किये हैं.
कृषि मंत्री ने भोक्ता पर लगाया कमीशनखोरी का आरोप : कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने आरोप लगाया कि ये योजना पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता के कार्यकाल की है. पूर्व विधायक भोक्ता की संवेदक से मिलीभगत थी. जिस कारण घटिया निर्माण कार्य किया गया. योजना 2012 की है. 2013-14 मे इंटकवेल बना. घटिया काम होने की वजह से इंटकवेल बह गया. संवेदक से मोटा कमीशन लिये हुए थे. पूरे मामले की वे जांच करायेंगे. इसको लेकर पीएचइडी के सचिव को निर्देश भी दिया है. दोषी संवेदक व अभियंता पर कार्रवाई करें.
भोक्ता ने कहा, कृषि मंत्री ने ही किया था शिलान्यास : पंप हाउस ध्वस्त होने के मामले पर पूर्व स्पीकर शशांक शेखर भोक्ता ने कहा कि योजना मेरे कार्यकाल में पास जरूर हुई लेकिन शिलान्यास कर काम कृषि मंत्री ने शुरू करवाया था. तीन साल मे इंटकवेल बना. पिलर के बदले पुल पर पाइप किसने बिछवायी, नावाडीह पानी टंकी तक पानी जाने से मंत्री ने रोका ताकि चितरा पानी नहीं जा सके. यह कार्य गुणवत्ता के साथ नहीं कराया गया. जिस कारण साधारण पानी से पंप हाउस ध्वस्त हो गया. निरीक्षण के अभाव मे संवेदक ने जम कर लूट मचायी. स्थानीय विधायक ने कभी योजना की समीक्षा नही की. कहा कि रघुवर सरकार के बड़बोले मंत्री के विकास का यह एक उदाहरण है. कितने चेकडैम शुरू होने से पहले बह गये. झामुमो इस योजना की गैर विभागीय जांच की मांग करता है. तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए.
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कार्यपालक अभियंता प्रदीप चौधरी ने कहा कि अजय बराज के सभी गेट खोल देने से तेज बहाव के कारण पंप हाउस बह गया. प्राकृतिक आपदा से बचने का कोई उपाय नही है. बड़े बड़े ब्रिज व रेलवे ट्रैक ध्वस्त हो जाते हैं, तो पंप हाउस क्या है. संवेदक को फिर से निर्माण करना होगा.
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