किसी विषय को हल्के में न लें, ऑनलाइन तैयारी करें : प्रशांत

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मधुपुर: यूपीएससी की परीक्षा में 772 रैंक लाने के बाद प्रशांत डालमिया पहली बार रामयश रोड स्थित अपने घर पहुंचे तो परिवार व आसपास के लोगों ने जोरदार ढंग से उनका स्वागत किया व उन्हें बधाई दी. प्रशांत ने पहले कोलकाता से सीए करने के बाद वेदांता ग्रुप में एक साल नौकरी की. उसके बाद […]

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मधुपुर: यूपीएससी की परीक्षा में 772 रैंक लाने के बाद प्रशांत डालमिया पहली बार रामयश रोड स्थित अपने घर पहुंचे तो परिवार व आसपास के लोगों ने जोरदार ढंग से उनका स्वागत किया व उन्हें बधाई दी. प्रशांत ने पहले कोलकाता से सीए करने के बाद वेदांता ग्रुप में एक साल नौकरी की. उसके बाद कोल इंडिया में अधिकारी के रूप में चयनित हुए.

लेकिन उसे छोड़ कर यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चले गये. इस बीच वित्त मंत्रालय में एडिनशनल डायरेक्टर ऑफ फाइनांस के पद पर चयनित हुए.

जिसमें अगले तीन जुलाई को योगदान देना था. लेकिन तब तक यूपीएससी में सफलता मिल चुकी थी. घर पहुंचने पर प्रभात खबर से प्रशांत ने खास बातचीत की. जिसमें यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण जानकारी दी. प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश :

सवाल: आइएएस बनने का ख्याल कब आया?
उत्तर : बचपन से ही यूपीएससी में जाने का सपना था. समाज के लिए कुछ करना चाहता था. इसी कारण वेदांता ग्रुप की नौकरी छोड़कर यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चला गया.
सवाल: इसकी प्रारंभिक तैयारी कैसे की?
उत्तर: खुद से तैयारी शुरू की. बगैर कोई कोचिंग लिये पढ़ाई की. ऑनलाइन तैयारी से काफी मदद मिली.
सवाल: किन-किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा?
उत्तर : अर्द्वशहरी परिवेश से आने के कारण कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा. सही मार्गदर्शन नहीं मिला. कोचिंग काफी महंगी होती है. लेकिन कुछ करने का जज्बा था. इसलिए मुश्किल आसान हो गयी.
सवाल: तैयारी के लिए कौन-कौन सी किताबें पढ़ी?
उत्तर : पॉलिटिकल साइंस के लिये लक्ष्मीकांत की, इतिहास व भूगोल के लिए एनसीइआरटी की, स्पेक्ट्रम आर्ट एंड कल्चर के लिए नितिन सिंहानिया की, इन्वायरनमेंट के लिये शंकर आइएएस की आदि महत्वपूर्ण किताबें हैं. साथ ही द हिंदू न्यूज पेपर व टाइम्स आफ इंडिया आदि अखबार पढ़े.
सवाल : इंटरनेट का सदुपयोग व कुछ ऐसे वेबसाइट जो तैयारी में सहायक हो?
उत्तर : वेबसाइट मुरूनाल, फोरम आइएएस, इनसाइट ऑन इंडिया, यूट्यूब काफी सहायक सिद्व हुआ.
सवाल: किनसे प्रेरणा मिली?
उत्तर : पापा गौतम डालमिया, घरवाले व कुछ करने की इच्छा से.
सवाल : किन विषयों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है?
उत्तर : तैयारी में सभी विषय बराबर हैं. जो कमजोर विषय है उसकी पूरी तैयारी करनी पड़ेगी. किसी विषय को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है.
सवाल : छोटे शहरो के बच्चे कैसे अपनी कल्पना को साकार करें?
उत्तर : यूपीएससी में काफी समय लगता है. प्रक्रिया लंबी है. लोग हताश होकर बीच में तैयारी छोड़ देते हैं. युवाओं को अपने ऊपर विश्वास रखना होगा. महत्वाकांक्षा और धैर्य होगा तो अवश्य यूपीएससी निकलेगा. कम मैटेरियल का चुनाव कर ज्यादा पढ़ने की जरूरत है.
सवाल : क्या जरूरी है कि निजी स्कूलों या बोर्डिंग के बच्चे ही सफल हो सकते हैं?
उत्तर : ऐसा कुछ नहीं है. ज्यादातर वही सफल होते हैं जो खुद से तैयारी करते हैं. ग्रामीण परिवेश से आने वाले बच्चे भी बराबर की संख्या में सफल होते हैं.
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