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चतरा के टुंगरीटांड़ बस्ती में पानी की किल्लत, 3 साल से खराब है चापाकल, ग्रामीणों की समस्या पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

Updated at : 03 Jun 2020 6:04 PM (IST)
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चतरा के टुंगरीटांड़ बस्ती में पानी की किल्लत, 3 साल से खराब है चापाकल, ग्रामीणों की समस्या पर नहीं दिया जा रहा ध्यान

चतरा जिला अंतर्गत इटखोरी प्रखंड की धनखेरी पंचायत में पानी की किल्लत शुरू हो गयी है. ग्रामीणों को पेयजल के संकट का सामना करना पड़ रहा है. एक ही जलस्त्रोत में मानव व मवेशी दोनों पानी पीने को मजबूर हैं.

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इटखोरी (चतरा) : चतरा जिला अंतर्गत इटखोरी प्रखंड की धनखेरी पंचायत में पानी की किल्लत शुरू हो गयी है. ग्रामीणों को पेयजल के संकट का सामना करना पड़ रहा है. एक ही जलस्त्रोत में मानव व मवेशी दोनों पानी पीने को मजबूर हैं. पानी की किल्लत पर पढ़ें विजय शर्मा की रिपोर्ट.

इटखोरी प्रखंड कार्यालय से मात्र आधा किलोमीटर दूर धनखेरी पंचायत के टुंगरीटांड़ बस्ती में पानी की किल्लत हो गयी है. बस्ती का चापाकल पिछले 3 साल से खराब है. ग्रामीणों की समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि बस्ती में एक व्यक्ति का निजी चापाकल है. किसी भी समारोह में जरूरत पड़ने पर उन्हीं के घर से पीने का पानी लाया जाता है.

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पानी की किल्लत से जूझ रही महिला सीता देवी ने कहा कि हमलोग अभी भी नदी के स्त्रोत का गंदा पानी को मजबूर हैं. चापाकल मरम्मतीकरण के लिए कई बार गुहार लगायी गयी, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया. अब तो स्थिति ऐसी हो गयी कि जानवर और इंसान एक ही नाला का पानी पीते हैं.

ग्रामीण शांति देवी ने कहा कि वोट के समय सभी आते हैं. समस्या का समाधान करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन उसके बाद कभी दिखाई नहीं देते हैं. मुखिया को भी कई बार इस संबंध में बोला गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

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ग्रामीण सीमा देवी कहती हैं कि हमलोगों का जीवन जानवरों से भी खराब हो गया है. जब शुद्ध पानी भी नसीब नहीं होता है तो और क्या मिलेगा. ग्रामीण अशोक पासवान व जितेंद्र पासवान ने कहा कि पिछले 3 साल से चापाकल खराब है. पीएचइडी विभाग का चक्कर लगाया जाता है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं.

इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) विजय कुमार ने कहा कि पीएचइडी विभाग को बोलकर खराब चापाकलों की जल्द मरम्मत करवा दी जायेगी. संभव हुआ, तो उसी विभाग के माध्यम से नया चापाकल लगवाने का भी प्रयास होगा.

Posted By : Samir ranjan.

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