एनसीसी कंपनी के जिम्मे अब खनन का ठेका

आम्रपाली कोल परियोजना में तीसरे फेज का टेंडर पेंच में फंसता नजर आ रहा है.
टंडवा. आम्रपाली कोल परियोजना में तीसरे फेज का टेंडर पेंच में फंसता नजर आ रहा है. पहली बार हुए टेंडर में खनन का ठेका कैलिवर कंपनी को मिला था, लेकिन तकनीकी पेंच आने से मामला कोर्ट में चला गया और टेंडर रद्द हो गया. सुप्रीम कोर्ट की ओर से कुछ शर्तों के साथ पुनः टेंडर पर कलिंगा कंपनी 24.7 प्रतिशत कम रेट डाल कर एल-वन हुई थी. नियमानुसार 15 प्रतिशत से ज्यादा लो रेट होने पर उतना सिक्यूरिटी जमा करना पड़ता है. कलिंगा कंपनी को लगभग 700 करोड़ से ज्यादा सिक्यूरिटी डिपॉजिट करनी था, लेकिन टेंडर लेने के बाद कंपनी ने हाथ खड़ा कर दिया. इसके बाद सीसीएल मामले को लेकर कोर्ट चली गयी. कोर्ट की ओर से एल-वन हुई कंपनी कलिंगा को डिबार करते हुए एल टू पर रही कंपनी एनसीसी को काम देने का निर्देश दिया. सीसीएल की ओर से एल टू पर रही एनसीसी कंपनी को आमंत्रित किया गया है. इधर, टेंडर के पेंच के कारण 25 दिनों से बंद उत्खन्न व डिस्पैच कार्य शुरु होने के आसार दिखने लगे हैं. बता दें कि आम्रपाली कोल परियोजना खुलने के बाद पहले फेज में वर्ष 2013-2014 में बीजीआर कंपनी ने 92 करोड़ की लागत से दो वर्ष का खनन का टेंडर लिया था. उसके बाद 2016-2017 में तीन कंपनियों ने ज्वाइंट वेंचर बनाकर अंबे महालक्ष्मी ज्वाइंट वेंचर आउटसोर्सिंग कंपनी ने आठ साल के लिए लगभग 1800 करोड़ का ठेका लिया. इसका समय सीमा समाप्त हो गया है. फिलहाल वर्तमान स्थिति को देखते हुए सीसीएल ने 13 मिलियन टन कोयले का एक छोटा टेंडर निकाला है, जिसे बीएलए कंपनी में लिया है. वर्करों ने 650 वर्करों के समायोजन को लेकर बीएलए कंपनी के कार्य को रोक रखा है और आंदोलन पर बैठे हैं. 25 दिनों से आम्रपाली में उत्पादन ठप है.
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