इटखोरी. सामाजिक कार्यकर्ता सत्येंद्र गिरी की मेहनत रंग लायी है. जिस जमीन पर केवल कंक्रीट व पत्थर थे, वहां आज हरियाली है. नौ कट्ठा जमीन को खेती योग्य बना दिया है. सत्येंद्र ने कभी कल्पना भी नहीं किया था कि इस जमीन पर खेती हो सकेगा. उसने कहा कि कुल नौ कट्ठा जमीन पर फसल लगी हुई है. मूंग, भिंडी, टमाटर, कद्दू, झिंगी, नेनुआ समेत कई सब्जियां लगी हुई है. उसने कहा कि अपने मेहनत व आत्मबल पर बंजर भूमि को खेती के लायक बनाये हैं. उत्पादित हरी सब्जियों को घरेलू इस्तेमाल करते हैं तथा शेष बचा हुआ व्यापारी ले जाते है. पटवन के लिए अपने खर्च पर बोरिंग कराये है. कृषि विभाग का सहयोग मिलता तो खेती का स्वरूप बदल जाता. उसने कहा कि मौसम के अनुसार फसल लगाते हैं.
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