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स्वतंत्रता आंदोलन में उर्दू भाषा की भूमिका पर सेमिनार का आयोजन

Updated at : 11 May 2025 8:12 PM (IST)
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स्वतंत्रता आंदोलन में उर्दू भाषा की भूमिका पर सेमिनार का आयोजन

रामनारायण मेमोरियल कॉलेज के सभागार में उर्दू विभाग के द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में उर्दू भाषा की भूमिका पर सेमिनार का आयोजन किया गया.

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11 सीएच 3- सेमीनार को संबोधित करते. हंटरगंज. रामनारायण मेमोरियल कॉलेज के सभागार में उर्दू विभाग के द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में उर्दू भाषा की भूमिका पर सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार की अध्यक्षता उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ फहीम अहमद व संचालन प्रो कमरुद्दीन अंसारी ने किया. मुख्य अतिथि के रूप में कॉलेज के प्राचार्य प्रो जैनेंद्र कुमार सिंह उपस्थित थे. इस मौके पर आईंक्यूएससी कोऑर्डिनेटर प्रो अनिल कुमार सिंह, अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष हाजी ताहिर हुसैना, सोशियोलॉजी विभाग के डॉ राजीव रंजन तिवारी, फिजिक्स विभाग के डॉ रामजीत यादव उपस्थित थे. मुख्य अतिथि ने कहा कि भाषा ही मनुष्य व पशु में फ़र्क करता है. मुस्लिम शासक भारत आये, तो अपने साथ वेशभूषा व अरबी फारसी भाषा भी साथ लाये. यहां की कई भाषाओं के साथ संस्कृत व हिन्दी के साथ मिश्रण हुआ और नए भाषा उर्दू की उत्पति हुई जो जन जन की बोल चाल की भाषा बन गयी. उर्दू भाषा के शब्द ने लोगों के दिलों तक पहुंच गया. अन्य भाषाओं के साथ उर्दू भाषा ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में महती भूमिका निभायी. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में इसका उल्लेख मिलता है. हिंदी की तरह ही उर्दू भी मूल रूप से भारतीय भाषा है. सेमिनार में हिना फिरदौस, सलमा परवीन, इशरत यासमीन, शाएमा परवीन, सानिया वहीद, रिफत फातमा, नूरुननिशा, मोहम्मद वसीम अकरम समेत अन्य उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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VIKASH NATH

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By VIKASH NATH

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