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डहुरी डैम में सिचाई के लिए बना नहर का अस्तित्व संकट में

Updated at : 20 Sep 2025 8:19 PM (IST)
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डहुरी डैम में सिचाई के लिए बना नहर का अस्तित्व संकट में

सदर प्रखंड के टीकर गांव में शनिवार को प्रभात आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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चतरा. सदर प्रखंड के टीकर गांव में शनिवार को प्रभात आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. यहां ग्रामीणों ने खुलकर क्षेत्र की समस्याओं को रखा. ग्रामीणों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या सिंचाई की है. डहुरी डैम से सिंचाई के लिए बनाया गया नहर झाड़ी में तब्दील हो गया है. कई जगहों पर नहर टूट जाने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. कई लोग नहर पर अतिक्रमण करते जा रहे हैं. किसान खेती नहीं कर पा रहे है. यहां के किसान कृषि पर ही आश्रित हैं. बरसात के पानी से एकमात्र फसल धान ही उगा पाते हैं. नहर जब जीवंत था, तो यहां के किसान विभिन्न फसलों की उपज कर अच्छी आमदनी करते थे. बरसात के बाद क्षेत्र की हजारों एकड़ जमीन बेकार पड़ी रहती है. गांव में सिंचाई के अलावा सड़क की भी समस्या है. टीकर मुख्य पथ से स्वास्थ्य उपकेंद्र तक जाने के लिए कच्ची सड़क है, बरसात में कीचड़ में तब्दील हो चुकी है. कई बार ग्रामीण जिला प्रशासन से नहर की मरम्मत कराने की मांग कर चुके है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. नहर में जब पानी आता था, तब किसान गेहूं, आलू, प्याज, लहसुन समेत कई नकदा फसल कर अच्छी आमदनी करते थे.

इन गांवों को मिलता था लाभ: नहर से टीकर के अलावा चंगेर, ओबरा, बजराही, कसियाडीह समेत कई गांवों को लाभ मिलता था. किसान नहर के पानी से सालों भर खेतों को हरा भरा कर फसल उगाते थे.

वर्जन:::

डहुरी डैम बनाने के लिए नहर भी बना था. दस वर्षो तक नहर का लाभ किसानों को मिला. किसान तरह-तरह की फसल उगाकर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने. 35 वर्षो से नहर खराब पड़ा है. सिंचाई की सुविधा नहीं रहने से सालों भर खेती नहीं कर पा रहे हैं.

कुलेश्वर दांगी

नहर का दिन-प्रतिदिन अतिक्रमण होता जा रहा है. यह नहर झाड़ी में तब्दील हो चुका है. खेतों तक पानी नहीं पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गयी है. यहां के लोग पूरी तरह कृषि पर ही आश्रित हैं. सालों भर खेती नहीं होने से यहां के लोग मजबूरन पलायन कर रहे हैं.

नरेश दांगी

क्षेत्र के किसान बारिश पर आश्रित हैं. सालभर में एकमात्र धान की खेती ही कर पाते हैं. नहर ठीक रहता, तो सालों भर खेती की जा सकती थी. आर्थित स्थिति भी ठीक रहती. नहर जहां-तहां टूटे रहने के कारण पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाता है. डैम का पानी भी बर्बाद हो रहा है.

मनोज पासवान

टीकर मुख्य पथ से स्वास्थ्य उपकेंद्र की दूरी एक किमी है. वहां तक जाने के लिए कच्ची सड़क है. नहर में बनी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गयी है. कीचड़ के कारण आवागमन में दिक्कत होती है. केंद्र में बिजली भी नहीं है. अंधेरे में इलाज कराना पड़ता है. विकट समस्या है.

संजय दांगी

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ANUJ SINGH

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By ANUJ SINGH

ANUJ SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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