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नोटबंदी से नहीं पहुंच रहे टमाटर के खरीदार

किसानों ने ऋण लेकर की थी टमाटर की खेती अब कर्ज चुकाने की सता रही है चिंता 1500 रुपये ट्रैक्टर टमाटर बेच रहे हैं किसान चतरा. नोटबंदी से टमाटर की खेती करनेवाले किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है. बाहर से व्यापारी टमाटर की खरीदारी करने नहीं पहुंच रहे हैं. किसानों से डेढ़ से […]

किसानों ने ऋण लेकर की थी टमाटर की खेती अब कर्ज चुकाने की सता रही है चिंता
1500 रुपये ट्रैक्टर टमाटर बेच रहे हैं किसान
चतरा. नोटबंदी से टमाटर की खेती करनेवाले किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है. बाहर से व्यापारी टमाटर की खरीदारी करने नहीं पहुंच रहे हैं. किसानों से डेढ़ से दो हजार रुपये ट्रैक्टर टमाटर खरीदी जा रही है. एक ट्रैक्टर में लगभग 10 क्विंटल से अधिक टमाटर रहता है.
गांवों में दो रुपये किलो टमाटर नहीं बिक रहा है. सिमरिया प्रखंड के पीरी, इचाक व चोपे पंचायत के करीब 200 से अधिक किसान इस वर्ष बड़ी उम्मीद के साथ टमाटर की खेती की थी. सबसे अधिक टमाटर की खेती अमगांवा, तलसा, पीरी, बोंगादाग, नावाटांड़, शीला, बिरहू, चोपे, तिबाग, अनगड्डा आदि गांवों में की गयी है. उक्त गांव के किसान टमाटर का सही मूल्य नहीं मिलने से खून की आंसू रो रहे हैं. अधिकांश किसान बैंकों से ऋण व मुहाजनों से सूद पर पैसा लेकर टमाटर की खेती की थी. अब पूंजी भी नहीं निकल रहा है. यहां के लोग टमाटर की खेती कर अपने बच्चों को उच्च शिक्षा व अपना जीविकोपार्जन चलाते हैं.
किसानों ने कहा: अमगांवा के किसान गोविंद साहू ने बताया कि 10 एकड़ में टमाटर की खेती की थी. खेती में चार लाख रुपये पूंजी लगायी थी. दो लाख रुपये सूद पर पैसा लेकर खेती की थी. टमाटर का अच्छा उत्पादन हुआ. लेकिन खरीदार नहीं मिल रहे है. अबतक एक लाख रुपये ही पूंजी वापस लौटी है. गोविंद ने बताया कि नोटबंदी के कारण बंगाल से व्यापारी नहीं आ रहे हैं, जिससे काफी नुकसान हो रहा है. पीरी के जागेश्वर महतो ने पांच एकड़ में टमाटर की खेती की है.
पूंजी नहीं निकलने से काफी चिंतित है. जागेश्वर ने बताया कि यही स्थिति रही, तो खेती करना भूल जायेंगे. तलसा के सचिदानंद साहू ने कहा कि धान लगाने योग्य खेत नहीं रहने के कारण टमाटर की ही खेती कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं. झारखंड ग्रामीण बैंक शीला से कर्ज लेकर टमाटर की खेती की थी. लेकिन नोटबंदी ने उसके व्यवसाय पर बुरा असर डाला. अब कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है. बाजार में दो रुपये भी टमाटर खरीदने वाला नहीं मिल रहा है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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