Chaibasa News : छोटे-छोटे बांध बना 20 वर्षों से वर्षा जल संचय कर रहे ग्रामीण, आय बढ़ी, पानी की नहीं होती किल्लत
Published by : MANJEET KUMAR PANDEY Updated At : 23 Mar 2025 12:01 PM
चाईबासा : सदर प्रखंड के केरकेट्टा गांव में जेटीडीएस की मदद से ग्रामीण ने पानी का महत्व समझा
चाईबासा.नदी-नाले व जलाशयों के लगातार सूखने की घटनाओं ने भविष्य में पानी के गंभीर संकट का अलार्म बजा दिया है. ऐसे में वर्षा जल संचयन ही एकमात्र उपाय है. हालांकि, इसके प्रति लोगों में जागरूकता की भारी कमी है. वहीं, पश्चिमी सिंहभूम में कुछ जगहों पर वर्षा जल संरक्षण शुरू किया गया है. इसके सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं. सदर प्रखंड के केरकेट्टा गांव के ग्रामीणों ने बहुत पहले पानी के महत्व को समझ लिया था. वे 20 वर्षों से वर्षा जल का संचय कर रहे हैं. इसका असर है कि गांव में पानी की किल्लत नहीं होती है. वहीं, वर्षा के पानी से खेती व मत्स्य पालन कर आय भी कर रहे हैं. गांव के किसान जगदीश सुंडी ने ग्रामीणों के इसके लिए जागरूक किया. झारखंड ट्राइबल डेवलपमेंट सोसाइटी (जेटीडीएस) की ओर से ग्रामीण बीते 20 वर्षों से वर्षा जल का संचय कर रहे हैं.
दरअसल, पहले गांव में पानी की किल्लत थी. जेटीडीएस की मदद से ग्रामीणों ने लूज पत्थर से छोटे-छोटे बांध बनाकर वर्षा जल संचय शुरू किया. इससे क्षेत्र की मिट्टी में नमी बनी रहती है. खेती कार्य में आसानी होती है.नोवामुंडी कॉलेज : वर्षा जल से हो रही बागवानी
नोवामुंडी कॉलेज में वर्षा जल को एक वाटर रिजर्वायर में जमा किया जाता है. इस जल का उपयोग कॉलेज परिसर की बागवानी व फूल के पौधों में पानी देने के लिए किया जाता है. वर्षा जल को सिंचित करते हुए कॉलेज परिसर के जलस्तर को बनाये रखने में मदद मिलती है.चाईबासा शहर के सभी घरों में सोक पिट बनाने का आदेश
चाईबासा नगर परिषद ने शहर से सभी घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के तहत सोक पिट बनाने का निर्देश दिया है. नप की प्रशासक संतोषनी मुूर्मू ने बताया कि कई लोगों ने अपने यहां सोक पिट नहीं बनवाया है. ऐसे घरों की जांच कर कार्रवाई की जायेगी. रैन वाटर हार्वेस्टिंग सभी के घरों में होना चाहिये.तालाब में जमा करते हैं घरों का पानी
तांतनगर प्रखंड के बिंगबुरु में शनिवार को जल सहिया सोमवारी सावैयां के नेतृत्व में विश्व जल दिवस मनाया गया. वर्षा जल संचय के लिए स्कूली बच्चों के साथ जागरूकता रैली निकाली. सभी को घर के पास सोकपिट बनाने की अपील की. जल सहिया ने बताया कि उनके गांव में पानी बचाने के लिए गड्ढों को तालाब का रूप दिया गया है. इसमें गांव लोगों के घर का पानी जमा हो जाता है. इससे भूगर्भ जल को रिचार्ज होने में सहूलियत होगी. मौके पर जल सहिया दीदी सोमबारी कुई , जल सहिया कविता देवी, अंजना गोप, कविता देवी, अंजना गोप, जेमा लागुरी व ज्योति लागुरी आदि उपस्थित थीं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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