Chaibasa News : अस्पताल के बरामदे में रात काटने को विवश हैं अटेंडर, न सुरक्षा, न सुविधा

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 08 Jul 2025 11:21 PM

विज्ञापन

चाईबासा. सदर अस्पताल में मरीजों के अटेंडर की ठहरने की व्यवस्था नहीं

विज्ञापन

चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिले के सबसे बड़े सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों के लिए रात्रि विश्राम की उचित व्यवस्था नहीं है. परिजन अस्पताल परिसर या आसपास किसी तरह समय काटते हैं. कई बार रात में असुरक्षित महसूस करते हैं. वहीं, चोरी का खतरा रहता है. परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

रैन बसेरा में लटका है ताला

अस्पताल परिसर में नगर परिषद ने रैन बसेरा का निर्माण कराया है. इसके दो कमरे में एक संस्था मुख्यमंत्री दाल-भात केंद्र संचालित कर रही है. एक कमरे को चालक विश्रामागार बनाया गया है. उसमें ताला लटका हुआ है.

असुरक्षित महसूस करते हैं अटेंडर

सदर अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने बताया कि सदर अस्पताल में रात्रि में ठहरने के लिए व्यवस्था नहीं है. रात्रि में सुरक्षा गार्ड से सभी को वार्ड से बाहर कर देते हैं. हमलोग खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं. वार्ड के बाहर बरामदे में समय काटने को विवश होते हैं. कई बार सामान की चोरी हो चुकी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल सीसीटीवी कैमरा का फुटेज देखने तक सीमित रह जाती है. अस्पताल प्रशासन को समस्या पर ध्यान देना चाहिए. अटेंडरों के लिए ठहरने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए. एक अटेंडर ने बताया कि रात को मरीज के साथ बेड पर या नीचे जमीन पर सोना पड़ता है.

”ससमय इलाज से टीबी को जड़ से मिटा सकते हैं”

चाईबासा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (शहरी) अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर मधु बाजार में मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई. इसमें शहरी क्षेत्र की सभी सहिया, बीटीटी व टीबी मुक्त भारत अभियान से संबंधित कर्मी शामिल हुए. सहियाओं को टीबी के लक्षण के बारे में बताया गया. लगातार दो-तीन सप्ताह से अधिक खांसी, बलगम के साथ खून आना, बुखार, रात में पसीना आना, वजन घटना, भूख न लगना और थकान आदि प्रमुख लक्षण हैं. खांसी में खून आना टीबी का महत्वपूर्ण लक्षण हो सकता है. अवनीश कुमार सिन्हा ने बताया कि कुछ मामलों में टीबी के कारण छाती में दर्द हो सकता है. फेफड़ों में संक्रमण के कारण सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. बताया गया कि टीबी की दवा सरकारी अस्पताल में मुफ्त मिलती है. सही समय पर इलाज शुरू करने से टीबी को ठीक किया जा सकता है. मौके पर प्रकाश ठाकुर, जितेंद्र कुमार, अगस्ती प्रधान आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ATUL PATHAK

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola