Chaibasa News : गुवा सेल प्रबंधन के खिलाफ ग्रामीणों का हल्ला बोल, रोजगार नहीं तो खदान नहीं

ग्रामसभा की अनदेखी और 75% स्थानीय रोजगार की मांग पर 10 गांवों के ग्रामीण लामबंद
गुवा. गुवा सेल की राजाबुरु खदान में सोमवार को जन-आक्रोश देखने को मिला. सारंडा के 10 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने सोमवार सुबह 6 बजे से खदान का कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया. सारंडा विकास समिति, जामकुंडिया-दुइया के बैनर तले अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया गया है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि सेल प्रबंधन और संबंधित ठेका कंपनी मां सरला पावर वर्क ने संवैधानिक नियमों की धज्जियां उड़ायी हैं. वर्तमान में खदान का संचालन पूरी तरह ठप है. खबर लिखे जाने तक प्रबंधन की ओर से वार्ता का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है.
स्थानीयों को 75 प्रतिशत रोजगार नहीं, तो खदान नहीं
आंदोलन की अध्यक्षता कर रहे सारंडा पीढ़ के मानकी लागुड़ा देवगम और गंगदा पंचायत के मुखिया राजू शांडिल ने कहा कि जब तक खदान में प्रभावित गांवों के स्थानीय युवाओं को 75 प्रतिशत रोजगार सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ने दिया जायेगा. उन्होंने स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक मजदूरी न मिलने पर भी रोष व्यक्त किया.ग्रामीणों के तीन प्रमुख मुद्दे
ग्राम सभा की अनदेखी :पेसा कानून के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में खनन से पहले ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य है, जो यहां नहीं ली गयी.
रोजगार में भेदभाव :
स्थानीय युवाओं को दरकिनार कर अधिकतर मजदूरों को बाहर से लाया गया है.संवैधानिक उल्लंघन :
पारंपरिक मानकी-मुंडा शासन व्यवस्था की सहमति के बिना खदान चालू की गयी है.पेड़ों के नीचे जमे ग्रामीण, चूल्हा जलाकर बना रहे खाना
ग्रामीण खदान परिसर के समीप पेड़ों के नीचे डेरा डाले हुए हैं. वहीं, चूल्हा जलाकर खाना बना रहे हैं. रात में भी डटे रहने की रणनीति तैयार है. आंदोलनकारियों ने प्रबंधन को स्पष्ट कर दिया है कि यदि इस दौरान कोई अप्रिय स्थिति पैदा होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी गुवा सेल प्रबंधन की होगी.बकाया भुगतान के लिए सड़क पर बैठे विजय-टू खदान के मजदूर
गुवा. गुवा क्षेत्र स्थित विजय-टू खदान से जुड़े मजदूरों का धैर्य अब जवाब दे गया है. 17 अगस्त से बंद खदान में कार्यरत लगभग 150 मजदूरों को अबतक न ग्रेच्युटी मिली है, न फाइनल भुगतान हुआ है. लंबे समय से टालमटोल का सामना कर रहे मजदूरों ने 23 फरवरी (सोमवार) से बंद खदान की सड़क पर बैठकर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया है. मजदूरों का आरोप है कि वेंडर कंपनी कमला इंटरप्राइजेज ने जानबूझकर उनके बकाया भुगतान को रोके रखा है. खदान बंद होने के तुरंत बाद फाइनल सेटलमेंट किया जाना चाहिए था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें उनका हक नहीं मिला. मामला पहले ही एएलसी कोर्ट, चाईबासा पहुंच चुका था, जहां 20 फरवरी तक भुगतान करने का आश्वासन दिया गया था. मजदूरों का आरोप है कि यह वादा भी झूठ साबित हुआ. आंदोलन को झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पाण्डे का भी समर्थन मिला है. विजय-टू खदान बंद होने के बाद मजदूर परिवार गहरे आर्थिक संकट में हैं. बच्चों की स्कूल फीस, घर का राशन और इलाज तक प्रभावित हो चुका है. मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी – पहले पैसा, फिर बात. उनका कहना है कि वे भीख नहीं, बल्कि अपनी मेहनत की कमाई मांग रहे हैं.
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