Chaibasa News : चाईबासा सदर अस्पताल में रक्त का अकाल, आफत में मरीजों की जान

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 14 Feb 2026 11:35 PM

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ऑपरेशन ठप थैलेसीमिया पीड़ित और गर्भवती महिलाएं रेफर की जा रहीं

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चाईबासा. पश्चिमी सिंहभूम जिला के चाईबासा सदर अस्पताल ब्लड बैंक में खून की भारी किल्लत हो गयी है. पिछले तीन दिनों से ब्लड बैंक में किसी ग्रुप का खून उपलब्ध नहीं है. ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजन खून की तलाश में भटक रहे हैं. दरअसल, ब्लड बैंक में रोज औसतन 15-20 यूनिट रक्त की खपत है, जबकि स्टॉक शून्य हो चुका है. मरीज के परिजनों की चिंता बढ़ गयी है कि आखिर जान कैसे बचेगी?.

नियमों के फेर में फंसा सिस्टम:

ब्लड बैंक में जान के संकट का मुख्य कारण हालिया नियमों में बदलाव है. चाईबासा में अक्तूबर, 2025 में पांच बच्चों को एचआइवी संक्रमित खून चढ़ाने के बाद राज्य सरकार ने रिप्लेसमेंट की प्रक्रिया बदल दी है. अब स्थानीय स्तर पर डोनेट किये गये खून को जांच और रिप्लेसमेंट के लिए जमशेदपुर (एमजीएम अस्पताल) भेजा जाता है. वहां से रिपोर्ट आने के बाद मरीजों को खून मिल पाता है. इस लंबी प्रक्रिया के कारण चाईबासा में रक्त का अकाल पड़ गया है.

कहीं दो सप्ताह से इलाज अधर में, तो सिजेरियन के लिए जमशेदपुर से रिप्लेसमेंट का इंतजार

सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में उपजा रक्त संकट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है. इन दो केस स्टडीज से समझा जा सकता है कि अस्पताल में स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है.

रक्तदान शिविरों में आयी कमी:

अस्पताल कर्मियों का कहना है कि जिले में रक्तदान शिविरों का आयोजन कम हो रहा है. लोग स्वेच्छा से रक्तदान के लिए कम आगे आ रहे हैं. पिछले दिनों कुछ शिविरों से रक्त संग्रह हुआ था, लेकिन भारी खपत के कारण वह पर्याप्त नहीं साबित हुआ.

केस स्टडी-01 : दो सप्ताह से ए-पॉजिटिव खून की तलाश

मंझारी प्रखंड के एक मरीज पिछले दो सप्ताह से सदर अस्पताल में भर्ती हैं. चिकित्सकों ने उन्हें तत्काल खून चढ़ाने की सलाह दी है. मरीज को ए-पॉजिटिव ग्रुप के खून की जरूरत है. मरीज के अटेंडर ने बताया कि वे लगातार ब्लड बैंक के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खून उपलब्ध नहीं होने के कारण इलाज आगे नहीं बढ़ पा रहा है. अब परिजनों के सामने मरीज की जान बचाने का संकट खड़ा हो गया है.

केस स्टडी-02 : रिप्लेसमेंट के फेर में फंसा गर्भवती महिला का ऑपरेशन

चक्रधरपुर से शुक्रवार शाम एक गर्भवती महिला को गंभीर स्थिति में सदर अस्पताल लाया गया. महिला का सिजेरियन (ऑपरेशन) होना अनिवार्य है, लेकिन ब्लड बैंक में स्टॉक नहीं होने के कारण ऑपरेशन टाल दिया गया. परिजनों ने आनन-फानन में एक यूनिट ब्लड डोनेट तो कर दिया, लेकिन नये नियमों के अनुसार उसे जांच और रिप्लेसमेंट के लिए जमशेदपुर भेजा गया है. शनिवार दोपहर तक परिजन जमशेदपुर से खून आने की राह देख रहे हैं, जबकि महिला की स्थिति नाजुक बनी हुई है.

ऑपरेशन ठप, सेवाएं प्रभावित

– सर्जरी पर रोक :

खून की कमी के कारण डॉक्टरों ने सिजेरियन और अन्य सामान्य ऑपरेशन टाल दिये हैं. बिना ब्लड बैकअप के डॉक्टर जोखिम नहीं ले रहे हैं.

– थैलेसीमिया पीड़ितों की दुर्दशा :

थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को समय पर खून नहीं मिल पा रहा है. परिजनों को कार्ड लेकर जमशेदपुर जाने की सलाह दी जा रही है.

– रेफर करना मजबूरी :

ब्लड बैंक कर्मियों द्वारा परिजनों को सरायकेला और एमजीएम अस्पताल जमशेदपुर भेजा जा रहा है, लेकिन वहां भी समय पर खून मिलना मुश्किल हो गया है.

सामाजिक संगठनों व एनजीओ से अपील

रक्त की आपूर्ति में परेशानी बढ़ गयी है. पहले ब्लड के बदले ब्लड मिलने से स्टॉक संतुलित रहता था. ब्लड बैंक के सामने चुनौती है कि आखिर रक्त का स्टॉक कैसे बनाये रखा जाये, ताकि किसी मरीज की जान खतरे में न पड़े. फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने सभी विभाग के साथ रक्तदान ग्रुप व विभिन्न सामाजिक संगठन और एनजीओ से स्वेच्छा से रक्तदान शिविर लगाने की अपील की है.

– डॉ शिवचरण हांसदा

, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल चाईबासा

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