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West Singhbhum News : तीन ओर नदी से घिरा, फिर भी सिंचाई को तरसता घाघरा गांव

Updated at : 03 May 2025 10:33 PM (IST)
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West Singhbhum News : तीन ओर नदी से घिरा, फिर भी सिंचाई को तरसता घाघरा गांव

बरसात में ब्लाॅक व पंचायत से कट जाता है टोला, खेतों की पगडंडियों ही सहारा

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चाईबासा/तांतनगर.

पश्चिमी सिंहभूम जिले के तांतनगर प्रखंड की कोकचो पंचायत के घाघरा गांव में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने गांव की समस्याएं गिनायीं. ग्रामीण बताते हैं कि सड़क नहीं बनने से यह गांव प्रखंड और पंचायत से पूरी तरह से कटा हुआ है. गांव का 75% क्षेत्र नदी से घिरा हुआ है. बताया कि सड़क नहीं होने से उन्हें खेतों की पगडंडियों पर चलना पड़ता है. करीब 900 की आबादी वाले इस गांव के लोगों की परेशानी उस समय और भी अधिक बढ़ जाती है जब बारिश का मौसम होता है. उस समय यह गांव एक टापू में तब्दील हो जाता है. बारिश के दिनों में यहां के लोग दूसरे गांवों तक आ-जा नहीं पाते हैं.

तीन तरफ नदियों से घिरा है गांव, फिर भी सिंचाई की सुविधा नहीं

अचरज की बात यह है कि सदर प्रखंड और तांतनगर प्रखंड की सीमा को विभाजित करने वाला यह गांव तीन तरफ से नदियों से घिरे होने के बावजूद यहां के किसानों के पास सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में किसानों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने प्रशासन और सरकार से डीप बोरिंग कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यदि डीप बोरिंग या नदी लिफ्ट सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करा दी जाए तो किसानों को खेती में सुविधा होगी. वे साल भर खेती कर पाएंगे. इससे उनका जीवन स्तर भी सुधर सकता है.

सड़क नहीं होने से रिश्तेदार यहां आने से कतराते हैं

ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गांव में पुलिया और सड़क निर्माण की भी मांग की है, लेकिन अब तक इस पर कोई पहल नहीं हुई है. सड़क नहीं होने के कारण रिश्तेदार भी गांव आने से कतराते हैं. बरसात के दिनों में फिसलन भरी पगडंडियों पर चलने के दौरान गिरकर घायल होने का खतरा भी बना रहता है. सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती. ऐसी स्थिति में यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है.

तीन माह से खराब पड़े हैं चापाकल व जलमीनार

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस राजस्व गांव में गांव में पेयजल की सुविधा के लिए पांच चापाकल लगाए गए हैं, लेकिन उनमें से तीन लंबे समय से खराब पड़े हैं. ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए सोलर आधारित जलमीनार लगायी गयी थी, लेकिन वह भी पिछले तीन महीनों से खराब पड़ी है.

ग्रामीणों के बोल

गांव में सडक की सुविधा नहीं रहने से हमलोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है. बारिश के दिनों में नदी का पानी भर जाता है, जिससे जिंदगी रुक जाती है. गांव में सड़क और पुलिया बननी चाहिए.

महती बुड़ीउली

गांव में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. मेरी उम्र 70 साल की है. सरकारी आवास और वृद्धा पेंशन नहीं मिलती है. वृद्ध होने के कारण मुझे बुनियादी सुविधाओं के लिए हमेशा परेशान होना पड़ता है.

लक्ष्मी बुड़ीउली

गांव के सभी लोग खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं. सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण हमलोगों को काफी परेशानी होती है. गांव की सोलर जलमीनार पिछले तीन माह से खराब पड़ी है. इससे पेजल की समस्या झेलनी पड़ रही है.

डुबलिया बुड़ीउली

गांव में सिंचाई की सुविधा नहीं रहने के कारण हमलोगों की खेती-बाड़ी भगवान भरोसे करनी पड़ती है. हमलोगों ने कई बार सिंचाई के लिए डीप बोरिंग कराने की मांग की है, लेकिन अब तक डीप बोरिंग नहीं हो सकी है.

सुदर्शन बुड़ीउली

गांव तीन तरफ नदी से घिरा है. इसके बाद भी पेयजल की समस्या बनी रहती है. गांव में पर्याप्त मात्रा में चापाकल की व्यवस्था नहीं है. गर्मी के दिनों में परेशानी और भी बढ़ जाती है. -मिचराय बुड़ीउली

सड़क नहीं होने से पंगडंडियों पर ही गांव के लोग निर्भर हैं. रिश्तेदार भी आने से कतराते हैं. तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती है. खटिया पर लादकर मरीज को मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. – कुशल बुड़ीउली

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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ATUL PATHAK

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

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