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जरीडीह बाजार में है जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में एक संभवनाथ का मंदिर

Updated at : 21 Apr 2024 10:52 PM (IST)
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जरीडीह बाजार में है जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में एक संभवनाथ का मंदिर

जरीडीह बाजार में है जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में एक संभवनाथ का मंदिर

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बेरमो . बेरमो अनुमंडल अंतर्गत प्रसिद्ध व्यवसायिक मंडी जरीडीह बाजार में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में एक संभवनाथ का मंदिर है. इसकी स्थापना 25 मई 1954 को जरीडीह बाजार के प्रतिष्ठित व्यवसायी मणीलाल राघव जी कोठारी ने की थी. बाद में ब्लास्टिंग के कारण मंदिर में आयी दरार के कारण पुन: 3 फरवरी 1984 को मंदिर की फिर से प्राण प्रतिष्ठा मणीलाल कांजी परिवार के सौजन्य से करायी गयी. तीसरी बार पुन: इस मंदिर का प्रतिष्ठा तीन मई 2008 को चक्षुदोश लग जाने के कारण करायी गयी. इस बार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के भागी कोलकाता के अरुण शांति लाल संघवी बने. 1954 में जब इस मंदिर की स्थापना की गयी तो यहां बेरमो, फुसरो, चनचनी, संडे बाजार, फ्राइडे बाजार, गांधीनगर तीन नंबर सहित अन्य क्षेत्रों से जैन धर्म से जुड़े लोगों का जमघट लगा करता था. उस वक्त करीब जैन धर्म से जुड़े 700-800 परिवार के लोगों का इस मंदिर में हर साल महावीर जयंती के अलावा अन्य धार्मिक अवसरों पर जुटान हुआ करता था. हर साल महावीर जयंती के दिन सुबह पूजा-पाठ के बाद भगवान की पालकी में प्रतिष्ठा रख कर पूरे बाजार में जुलूस की शक्ल में भ्रमण कराया जाता था. इसके बाद सामूहिक भोजन होता था. पहले इस मंदिर में प्राय: जैन धर्म से जुड़े गुरु महाराज का आगमन हुआ करता था. साथ ही चतुर्मास होता था. मंदिर में पाठशाला चला करती थी, जिसमें गुरु महाराज का दिन में धर्म का ज्ञान से जुड़ा प्रवचन होता था. शाम में भजन व आरती के बाद प्रसाद वितरण किया जाता था.अब गुरु का प्रवचन लगभग समाप्त सा हो गया है. भजन व आरती सप्ताह में एक दिन होता है. इस मंदिर के हर कार्यक्रम के दौरान पूरे जरीडीह बाजार में उस वक्त अलग ही रौनक हुआ करती थी. पुराने लोग बताते हैं कि जरीडीह बाजार में सैकड़ों की संख्या में गुजराती जैन, मारवाड़ी जैन, ओसवाल परिवार आदि 1930-32 के आसपास गुजरात व सौराष्ट्र से यहां आये. अब इनकी संख्या यहां मुश्किल से पचास के लगभग रह गयी है. यहां शुरू से रह रहे जैन समाज के लोग श्वेतांबर जैन धर्म से जुडे़ हुए है. जैन समाज से जुडे़ कई चर्चित लोग थे यहां पहले जरीडीह बाजार में जैन धर्म से जुड़े कई चर्चित लोग यहां करते थे. जिसमें मुख्य रूप से मणीलाल राघव जी कोठारी, मणीलाल कांजी, बनेचंद बेलजी. मणीलाल टोलिया,आसकरण कोचर, कांति लाल मेहता, मूलचंद गिडिया, कस्तुरचंद मेहता, हरसुख लाल कोठारी, शांति लाल जैन, मेघराज जैन, ताराचंद जैन, ईश्वरलाल कपूरचंद,दलचंद भाई, भिखू भाई, चुन्नी लाल रमानी, अमृल लाल दोषी, लव भाई, रमणिक भाई ध्रुप,आसकरण जैन,मिलापचंद जैन आदि शामिल थे. आस्था का केंद्र है साड़म का श्री दिगंबर जैन मंदिर गोमिया प्रखंड के साड़म बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. इस मंदिर की स्थापना 2012 में की गयी थी और इसमें कमल कुमार जैन, स्व महाबीर जैन, भागचंद जैन, बिनोद कुमार जैन, घोटु जैन आदि का अहम योगदान था. हालांकि यहां 1980 से ही दूसरे स्थान में छोटे से जगह पर पूजन होता था. इस मंदिर में जैन समाज के लोग रोजाना पूजा अर्चना करते हैं. सुबह में भगवान का जलाभिषेक के बाद शांति धारा, पूजन पाठ और संध्या आरती होती है. मंदिर में भगवान महावीर की भव्य प्रतिमा स्थापित है और मंदिर भी आकर्षक है. मंदिर में जैन समाज के द्वारा प्रत्युषण पर्व, महावीर जयंती आदि पूरे धूमधाम से मनाया जाता है. इसी प्रकार मधुबन व अन्य धार्मिक स्थलों से बराबर गुरु महाराज का पदार्पण होता है और इस दौरान पूजन, पाठ, प्रवचन आदि का कार्यक्रम किया जाता है.

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