Uber का बड़ा प्लान: अब ड्राइवरों की कारें बनेंगी डेटा मशीन, सेल्फ-ड्राइविंग AI को मिलेगी नई रफ्तार

Published by : Rajeev Kumar Updated At : 05 May 2026 5:59 PM

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अब सड़क पर दौड़ती हर Uber कार बनेगी AI ट्रेनर / AI तस्वीर

Uber अब ड्राइवर कारों को डेटा कलेक्टर बनाकर सेल्फ-ड्राइविंग AI कंपनियों की मदद करना चाहता है. AV क्लाउड और शैडो मोड जैसे नए फीचर्स टेक इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.

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राइड-हेलिंग कंपनी Uber आने वाले समय में अपने प्लैटफॉर्म को सिर्फ कैब बुकिंग तक सीमित नहीं रखना चाहती. कंपनी अब एक ऐसे मॉडल पर काम कर रही है, जहां उसके ड्राइवरों की गाड़ियां सड़कों पर चलते-फिरते डेटा कलेक्टर बन जाएंगी. यह डेटा सेल्फ-ड्राइविंग कार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम तैयार करने वाली कंपनियों के लिए बेहद कीमती साबित हो सकता है. इस रणनीति के पीछे मकसद है- रियल वर्ल्ड ड्राइविंग डेटा का विशाल नेटवर्क तैयार करना, जो भविष्य की ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी को तेजी से आगे बढ़ा सके.

ड्राइवर नेटवर्क बनेगा डेटा इंजन

Uber के पास दुनिया भर में लाखों ड्राइवर जुड़े हुए हैं. कंपनी का मानना है कि अगर इनमें से थोड़े से वाहनों में भी सेंसर-आधारित सिस्टम लगा दिया जाए, तो यह दुनिया के सबसे बड़े ड्राइविंग डेटा नेटवर्क में बदल सकता है.

अभी कंपनी का AV (Autonomous Vehicle) लैब प्रोग्राम सीमित संख्या में खास सेंसर से लैस कारों पर निर्भर है. लेकिन भविष्य की योजना इससे कहीं आगे की है- जहां आम ड्राइवर भी इस इकोसिस्टम का हिस्सा बनेंगे.

सेल्फ-ड्राइविंग कंपनियों के लिए बड़ा मौका

सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी की दुनिया में सबसे बड़ी चुनौती अब सिर्फ तकनीक बनाना नहीं, बल्कि उसे ट्रेन करने के लिए सही और पर्याप्त डेटा जुटाना है.

उदाहरण के तौर पर, किसी स्कूल के पास ट्रैफिक पैटर्न या भीड़भाड़ वाले चौराहों का डेटा जुटाना आसान नहीं होता. इसके लिए बड़े फ्लीट और भारी निवेश की जरूरत होती है.

Uber इसी समस्या को अवसर में बदलना चाहता है. कंपनी पहले से ही करीब 25 ऑटोनॉमस व्हीकल कंपनियों के साथ साझेदारी कर चुकी है, जिनमें Wayve जैसी कंपनियां शामिल हैं.

AV क्लाउड और शैडो मोड क्या है?

Uber एक AV क्लाउड तैयार कर रहा है, जो सेंसर से मिले डेटा का बड़ा डेटाबेस होगा. यह डेटा पार्टनर कंपनियों को उनके AI मॉडल ट्रेन करने में मदद करेगा.

इसके साथ ही कंपनी शैडो मोड पर भी काम कर रही है. इसमें AI मॉडल असली राइड के दौरान वर्चुअली चलता है, लेकिन कार को कंट्रोल नहीं करता. इससे कंपनियों को बिना जोखिम के अपने सिस्टम की परफॉर्मेंस समझने का मौका मिलता है.

प्राइवेसी और नियमों की बड़ी चुनौती

इतना बड़ा डेटा नेटवर्क बनाना आसान नहीं है. इसमें सबसे बड़ी चुनौती प्राइवेसी और डेटा शेयरिंग से जुड़े नियम होंगे.

कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि यात्रियों और ड्राइवरों की निजी जानकारी सुरक्षित रहे. साथ ही, अलग-अलग देशों के नियमों के अनुसार डेटा का इस्तेमाल करना भी जरूरी होगा.

AI से Uber के अंदर भी बड़ा बदलाव

Uber सिर्फ बाहर की कंपनियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अंदर भी AI का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है.

कंपनी के इंजीनियर अब बड़े पैमाने पर AI टूल्स का उपयोग कर रहे हैं. हालात ऐसे हैं कि हर हफ्ते हजारों कोड बदलाव सीधे AI के जरिए हो रहे हैं.

करीब 70% तक कोड अब AI-सहायता से तैयार हो रहा है, जो कुछ महीनों पहले तक बेहद कम था. इसे कंपनी एजेंटिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का नाम दे रही है, जहां AI खुद फैसले लेकर काम करता है.

फ्यूचर स्ट्रैटेजी: डेटा ही बनेगा असली ताकत

Uber का यह कदम साफ दिखाता है कि आने वाले समय में डेटा सबसे बड़ा हथियार बनने वाला है.

जो कंपनी जितना ज्यादा और बेहतर डेटा जुटा पाएगी, वही AI और सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी की रेस में आगे रहेगी. Uber खुद को इसी रेस में एक बड़े डेटा प्लेयर के रूप में स्थापित करना चाहता है.

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लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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