केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीति के विरोध में मजदूरों को करना होगा संघर्ष : तपन सेन

Author C p singh|Edited by Kumarvishwat Sen
Updated:
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20 | Prabhat Khabar Network

सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तपन सेन ने केंद्र सरकार की श्रम नीतियों को शोषणकारी बताया और मजदूरों से संघर्ष का आह्वान किया।

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बोकारो. इस्पात मजदूर मोरचा(सीटू)-बोकारो की बैठक गुरूवार को सेक्टर 04 में हुई. सेल मजदूरों के वेतन समझौता को पुरा करने व ठेका मजदूरों के 40% छंटनी के संदर्भ में बैठक हुई. सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तपन सेन ने कहा : ट्रेड यूनियन लगातार श्रम-विरोधी व नियोक्ता समर्थक श्रम संहिताओं का विरोध करती रही है, जिसे तथाकथित श्रम सुधार व इज आफ डूइंग बिजनेस के नाम पर लाया गया है. 12 फरवरी की आम हड़ताल के बाद भी केंद्र सरकार इन श्रम संहिताओं को वापस लेने या इस मुद्दे पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ कोई सार्थक बैठक करने से बच रही है. अध्यक्षता बीडी प्रसाद ने किया. आंदोलन के बदौलत प्राप्त हुआ है अधिकार

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श्री सेन ने कहा : इन संहिताओं के मसौदा तैयार करने के चरण से ही ट्रेड यूनियनों जैसे हितधारकों से कोई परामर्श नहीं किया गया. कार्यबल के जीवन से जुड़े गंभीर मुद्दा भारतीय श्रम सम्मेलन भी नहीं बुलाया गया. यह अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों का उल्लंघन है, जिनके प्रति भारत एक राष्ट्र के रूप में प्रतिबद्ध है. श्री सेन ने कहा : श्रम संहिताएं श्रमिकों को फिर से ब्रिटिश औपनिवेशिक काल जैसी शोषणकारी परिस्थितियों में धकेलने का प्रयास हैं. श्रमिक वर्ग ने शोषण के खिलाफ व 08 घंटे के कार्यदिवस, कार्यस्थल सुरक्षा, यूनियन बनाने व संगठित होने व हड़ताल का अधिकार समेत अन्य मांग आंदोलन के बदौलत प्राप्त किया है. श्री सेन ने कहा : केंद्र सरकार इन श्रम संहिताओं के माध्यम से इन उपलब्धियों को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है. यूनियन व पंजीकरण करना मुश्किल हो जायेगा. जबकि, निरस्तीकरण आसान हो जायेगा. नियोक्ताओं के उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जा रहा है, जबकि ट्रेड यूनियन गतिविधियों को दंडनीय बनाया जा रहा है. हड़ताल का अधिकार लगभग समाप्त कर दिया गया है. न्यूनतम वेतन कानूनों को कमजोर कर गरीबी रेखा से नीचे राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन लागू करने की कोशिश की जा रही है. सीटू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सेन ने कहा : ऐसी स्थिति में ट्रेड यूनियन व श्रमिक संगठन के पास इन श्रम संहिताओं के खिलाफ संघर्ष जारी रखने व उनके क्रियान्वयन के खिलाफ प्रतिरोध खड़ा करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. केंद्र सरकार की मजदूर विरोधी नीति के विरोध में मजदूरों को संघर्ष करना होगा. यूनियन महामंत्री आरके गोरांई ने सेल प्रबंधन को बकाया वेतन समझौता अविलंब पूरा करने व ठेका मजदूरों को 40% छंटनी के फरमान को अविलंब वापस लेने की मांग की. मौके पर यूनियन के पदाधिकारी व दर्जनों सदस्य व मजदूर मौजूद थे.


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