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Success Story: दीदी कैफे चलाकर आत्मनिर्भर बनीं गोमिया की 5 महिलाएं

Updated at : 11 Feb 2025 6:18 PM (IST)
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गोमिया प्रखंड कार्यालय के बाहर शेड में दीदी कैफे चलातीं हैं 5 महिलाएं. फोटो : प्रभात खबर

Success Story: लीला, प्रमिला, कुसमी, गीता और सुशीला दीदी कैफे खोलकर आत्मनिर्भर बन गयीं हैं. आज वह अपने इलाके की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन गयीं हैं.

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Success Story|गोमिया (बोकारो), नागेश्वर : बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में 5 महिलाएं मिलकर दीदी कैफे चला रहीं हैं. कभी गरीबी में जीवन यापन करने वाली ये महिलाएं दीदी कैफे चलाकर आत्मनिर्भर बन गयीं हैं. इन महिलाओं के नाम लीला देवी, प्रमिला देवी, कुसमी देवी, गीता देवी और सुशीला देवी हैं. इन्होंने मिलकर 8 वर्ष पहले गोमिया प्रखंड मुख्यालय के पास वाहन शेड में ‘दीदी कैफे’ शुरू की थी. ये सभी महिलाएं ‘कमल आजीविका सखी मंडल’ से जुड़ी हैं. इन महिलाओं ने बताया कि ‘दीदी कैफे’ के जरिये ये लोग अब आत्मनिर्भर बन गयीं हैं. हालांकि, इन्होंने यह नहीं बताया कि ये लोग आज कितना कमाई कर रहीं हैं, लेकिन इतना जरूर कहतीं हैं कि 10 हजार रुपये खर्च करके दीदी कैफे की शुरुआत की थी. अब परिवार का भरण-पोषण आराम से हो जाता है.

वाहन रखने वाले शेड में चलता है ‘दीदी कैफे’

लीला, प्रमिला, कुसमी, गीता और सुशीला कहतीं हैं कि प्रखंड कार्यालय के पास उनके लिए एक छोटे-से कमरे की व्यवस्था की गयी है. इसी कमरे में वे अपना सामान रखतीं हैं. वाहन रखने के लिए बने शेड में उन्होंने चूल्हा बना रखा है. उसी में खाना बनातीं हैं. इस कैफे में नाश्ता और भोजन का उत्तम प्रबंध करतीं हैं.

शेड में ग्राहकों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं

शेड में ग्राहकों को बैठाने की उचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अच्छी बात यह है कि इनके कैफे में आम आदमी से लकर प्रखंड कार्यालय के बड़ा बाबू तक भोजन करने आते हैं. यहां ग्राहकों को आसपास के अन्य होटल्स की तुलना में सस्ता भोजन मिलता है. भोजन की गुणवत्ता भी अच्छी होती है.

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अपने काम और कमाई से संतुष्ट हैं सभी महिलाएं

ग्राहकों के बैठने के लिए उचित प्रबंध नहीं होने की वजह से दीदी कैफे चलाने वाली महिलाओं को थोड़ी निराशा होती है, लेकिन अपने काम से सभी संतुष्ट हैं. उन्हें इस बात का सुकून है कि वह अपने कैफे में आने वाले लोगों को अच्छा भोजन परोसती हैं. अपनी कमाई से भी वह संतुष्ट हैं. ये महिलाएं चाहतीं हैं कि उनके कैफे में बैठने और खाने के लिए उचित व्यवस्था हो. अलग से रसोई बन जाये, तो वह और बेहतर सेवा दे सकतीं हैं.

बीडीओ से कैंटीन बनाने की समूह की दीदियों ने की मांग

महिला समूह की दीदियां कहतीं हैं कि प्रखंड विकास पदाधिकारी अगर उनकी समस्याओं का समाधान कर दें, तो ग्राहकों को और बेहतर सेवा दे सकेंगी. इस संबंध में पूछने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) महादेव कुमार महतो ने कहा कि प्रयास होगा कि एक सुसज्जित कैंटीन बने, ताकि कार्यालय में आने वाले लोग यहां बैठकर जलपान और खाना खा सकें. इस संबंध में जिला प्रशासन से भी बात करेंगे और समस्याओं का समाधान करेंगे.

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दीदी कैफे को हर दिन हो जाती है 1500 रुपए की बचत

गरीब परिवारों से आने वाली इन महिलाओं ने कहा कि दीदी कैफे चलाकर वह खुद तो सशक्त हो ही रहीं हैं, अपने परिवार की भी आर्थिक मदद कर रहीं हैं. दीदी कैफे की हर दिन की कमाई 1500 रुपए के आसपास है. इस तरह एक महिला के हिस्से 250 से 300 रुपए आ जाते हैं. सभी महिलाएं अपनी कमाई से खुश हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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