Bokaro News : सेवानिवृत्त सीसीएलकर्मियाें को काटना पड़ रहा कार्यालयों का चक्कर

Published by : JANAK SINGH CHOUDHARY Updated At : 08 May 2025 12:56 AM

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Bokaro News : सेवानिवृत्त सीसीएल कर्मियों को अपना हक पाने के लिए एरिया व परियोजना कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है.

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राकेश वर्मा, बेरमो : सेवानिवृत्त सीसीएल कर्मियों को अपना हक पाने के लिए एरिया व परियोजना कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. इसी को लेकर 28 मार्च को बीएंडके एरिया में सीसीएल के तीनों एरिया बीएंडके, ढोरी व कथारा एरिया की विभिन्न परियोजनाओं से सेवानिवृत सैकड़ों सेवानिवृत्त कर्मियों का जुटान हुआ था. इसमें उन्होंने अपने कई मामलों को पुरजोर रूप से रखा था.

मुख्य रूप से ये मामले हैं लंबित

क्वार्टर के एवज में ग्रेच्युटी राशि पर रोक : सबसे ज्यादा मामले ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं होने के हैं. तीनों एरिया में करीब ढाई सौ सेवानिवृत्त कर्मियों को प्रबंधन द्वारा क्वार्टर का एनओसी नहीं दिये जाने के कारण तीन-चार साल बाद भी ग्रेच्युटी राशि नहीं मिली है. साथ ही रोकी गयी ग्रेच्युटी राशि से तीन से आठ हजार रुपया सीसीएल प्रबंधन बतौर पैनल रेंट काट रहा है. कई ऐसे भी सेवानिवृत्त कर्मी हैं, जिन्हें एनओसी जमा होने के बाद भी ग्रेच्युटी राशि नहीं मिल है.

लीव इनकैशमेंट की राशि का भुगतान नहीं होना : वर्ष 2018 से 2024 तक के सेवानिवृत्त कर्मियों के लीव इनकैशमेंट का भुगतान भी लंबित है. इसके सबसे ज्यादा मामले ढोरी एरिया में है. कई को पीएफ एवं ग्रेच्युटी राशि का भुगतान हो गया है, लीव इनकैशमेंट के भुगतान पर रोक लगा कर रख दी गयी है. प्रबंधन द्वारा कभी बिल नहीं आने, कभी सेंक्शन नहीं मिलने की बात कही जाती है. लीव इनकैशमेंट में 50 हजार से लेकर सात लाख रुपया तक मिलता है. पेंशन रिवाइज नहीं होना : तीनों एरिया के करीब ढाई सौ सेवानिवृत्त सीसीएल कर्मियों को एनसीडब्ल्यूए-10 का पेंशन रिवाइज नहीं होने के कारण बढ़ी हुई दर से पेंशन नहीं मिल रही है. अब एनसीडब्ल्यूए-11 का भी समझौता हो गया है, इसका भी पेंशन रिवाइज नहीं हुआ है. पेंशन रिवाइज होती तो रिटायर्ड कर्मियों का पेंशन बढ़ती. सीपीआरएमएस (एनई) के तहत स्मार्ट कार्ड, इलाज में हुए खर्च की राशि में कटौती का मामला : सेवानिवृत्त कर्मियों को इलाज में जो खर्च होता है, उसका पूरा भुगतान नहीं मिल पाता है. सारे मेडिकल बिल हेडक्वार्टर स्तर पर जमा करना होता है. अगर एरिया स्तर पर इसके लिए नोडल ऑफिसर नियुक्त कर दिया जाता तो आसानी होती. सेवानिवृत्त कर्मी स्मार्ट कार्ड की भी मांग कर रहे हैं. साथ ही सीजीएसएस (सेंट्रल गर्वमेंट हेल्थ सर्विसेज) के रेट पर अपना इलाज कराने की मांग कर रहे हैं.

20 लाख ग्रेच्युटी भुगतान का मामला : भारत सरकार द्वारा ग्रेच्युटी संबंधित एक नोटिफिकेशन 2018 में जारी किया गया था. इसमें ग्रेच्युटी भुगतान का सीलिंग 10 लाख रुपये से बढ़ा कर 20 लाख की गयी थी. इसके तहत कोल इंडिया में जनवरी 2017 से लेकर फरवरी 2018 के बीच सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों व कर्मियों को लाभान्वित होना चाहिए था. मगर कोल इंडिया ने जनवरी 2018 में एक आदेश जारी कर बताया कि एक जनवरी 2017 से फरवरी 2018 के बीच में सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों को ग्रेच्युटी के एरियर का 20 लाख रुपया भुगतान किया जायेगा. सूत्रों की मानें तो 14 हजार सेवानिवृत्त कोलकर्मियों को अंतर राशि का भुगतान किया गया तो कोल इंडिया को लगभग 900 करोड़ रुपये लगेंगे. प्रबंधन का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा 20 लाख रुपया ग्रेच्युटी राशि करने से संबंधित एक्ट में संशोधन फरवरी 2018 से हुआ है. इसलिए मार्च 2018 से बढ़ी हुई ग्रेच्युटी की राशि दी जा रही है. बहरहाल यह मामला नागपुर उच्च न्यायालय में लंबित है.

क्या कहते हैं एटक नेता

एटक नेता व जेबीसीसीआइ सदस्य लखनलाल महतो का कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मियों के प्रति कोल इंडिया प्रबंधन गंभीर नहीं है. इसके कारण कई मामले लंबित पडे़ हैं और सेवानिवृत्त कर्मियों को कार्यालय व बाबुओं का चक्कर काटना पड़ रहा है. एरिया स्तर पर मजदूर संगठनों की शिथिलता के कारण भी कई मामलों के निराकरण में तेजी नहीं आ पा रही है.

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