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आज सुबह कुवैत से बनारस पहुंचेगा प्रवीण का शव

Updated at : 15 Jun 2024 12:42 AM (IST)
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आज सुबह कुवैत से बनारस पहुंचेगा प्रवीण का शव

आज सुबह कुवैत से बनारस पहुंचेगा प्रवीण का शव

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बेरमो . कुवैत में बुधवार को आग लगने की घटना में जान गंवाने वाले 45 भारतीयों में दुगदा न्यू बीसीसीएल कॉलोनी में एक साल पहले तक रहने वाले प्रवीण माधव सिंह भी शामिल थे. अब उनका परिवार बनारस में रहता है. उनके पिता सेवानिवृत्त बीसीसीएल कर्मी जेपी सिंह ने प्रभात खबर से बातचीत में कहा कि छोटे पुत्र विकास सिंह से लगातार भारतीय दूतावास व सरकार के लोग तथा अधिकारी संपर्क में हैं. उन्होंने जानकारी दी है कि प्रवीण का शव शनिवार को बनारस पहुंचा जायेगा. इघर, घटना की जानकारी मिलने के बाद से प्रवीण के पूरे परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है. प्रवीण के पिता जेपी सिंह के चारों भाई सहित पूरा परिवार बनारस स्थित आवास पहुंचा हुआ है. जेपी सिंह ने बताया कि शनिवार को बनारस में ही गंगा नदी के तट पर अंतिम संस्कार होगा. श्राद्ध कार्यक्रम उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले के करैयां गांव में होगा. श्री सिंह ने बताया कि शुक्रवार को मंत्री ओमप्रकाश राजभर के अलावा कलेक्टर सहित कई अधिकारी आये थे. मालूम हो कि प्रवीण सिंह दस साल से कुवैत में नौकरी कर रहे थे. दो महीने पूर्व छुट्टी में अपने घर बनारस आये थे. 15 दिन रहने के बाद लौट गये थे.

पिता के साथ 1989 में तीन साल की उम्र में दुगदा आये थे प्रवीण

प्रवीण माधव सिंह के पड़ोस में रहने वाले बाल किशुन प्रसाद ने बताया कि प्रवीण माधव सिंह के पिता जयप्रकाश सिंह बीसीसीएल के ब्लॉक टू एरिया में फोरमैन थे. अगस्त 2023 में सेवानिवृत्त हो गये. अक्टूबर में पैतृक आवास बनारस चले गये. उनके छोटे बेटे का नाम अमन सिंह है. प्रवीण माधव सिंह के मित्र शंभू सिंह ने कहा कि प्रवीण मिलनसार व्यक्ति था. वह बचपन से ही बीसीसीएल कालोनी वासियों का बहुत प्यारा था. सभी लोग उसे सोनू के नाम से ही जानते थे. उनकी दो बेटियां हैं. ममहर समस्तीपुर है.

पड़ोसी नागेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि प्रवीण माधव सिंह तीन साल की उम्र में अपने पिता के साथ वर्ष 1989 में दुगदा आया था. व्यवहार कुशल लड़का था. उसने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर देव नगर एवं डीएवी दुगदा से पढ़ाई की थी. दिसंबर 2023 में उसने कहा था कि और चार माह कुवैत में नौकरी करेगा. वहां काफी दिक्कत है. कंपनी में चार-पांच लाख रुपया बकाया है. अगर पहले ड्यूटी छोड़ देंगे तो वह पैसा नहीं मिलेगा. सारा बकाया मिल जाने के बाद बनारस में ही रहेंगे और वही व्यवसाय करेंगे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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