न दहेज, न लग्जरी कार, पुरखों की परंपरा को सम्मान, कसमार में बैलगाड़ी पर निकली बारात

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बैलगाड़ी पर दुल्हन को लेकर लौटते नागेश्वर महतो.

बैलगाड़ी पर दुल्हन को लेकर लौटते नागेश्वर महतो.

कसमार प्रखंड में बिना दहेज के संपन्न हुई एक अनोखी शादी ने सभी का ध्यान खींचा. फूलों से सजी बैलगाड़ी पर निकली बारात ने पुरखों की परंपरा को जीवित किया और विवाह के मायने बताए.

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प्रतिनिधि, कसमार

कसमार (बोकारो). आज जहां शादियों में लग्जरी कारों और करोड़ों रुपये के खर्च का चलन बढ़ता जा रहा है, वहीं बोकारो के कसमार प्रखंड में एक अनोखी शादी ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. यहां फूलों से सजी बैलगाड़ी पर बारात निकली और बिना दहेज के विवाह संपन्न हुआ. इस अनूठी पहल ने पुरखों की परंपरा को सम्मान देने के साथ समाज को दहेज मुक्त विवाह का संदेश भी दिया. कसमार प्रखंड के तेलियाडीह टांगटोना निवासी शिव महतो के पुत्र जनार्दन कुमार महतो का विवाह मुंगो बगदा निवासी नागेश्वर महतो की पुत्री श्वेता कुमारी के साथ हुआ. इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि दूल्हा करीब पांच किलोमीटर की दूरी बैलगाड़ी पर तय कर बारात लेकर पहुंचा. विवाह के बाद दुल्हन की विदाई भी उसी बैलगाड़ी से हुई.

रास्ते भर उमड़ी लोगों की भीड़

वर्षों बाद बैलगाड़ी पर निकली बारात को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुट गई. ग्रामीणों ने इस अनोखे नजारे को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया. बैलगाड़ी के पीछे कुड़माली लोकधुनों और घोड़ा नाच की प्रस्तुति के साथ बाराती पैदल चलते रहे, जिससे पूरा माहौल पारंपरिक रंग में रंग गया.

कुड़माली परंपरा के अनुसार हुई शादी

विवाह की सभी रस्में कुड़माली समाज के पारंपरिक नेगचार के अनुसार संपन्न हुईं. वर और वधू पक्ष ने स्पष्ट संदेश दिया कि विवाह कोई सौदा नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार है. बिना दहेज के इस विवाह की ग्रामीणों ने जमकर सराहना की.

ग्रामीणों ने मिलकर सजाई बैलगाड़ी

इस आयोजन को यादगार बनाने में ग्रामीणों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मंजूरा निवासी मिथिलेश महतो ने बैलगाड़ी का रंग-रोगन किया, जबकि डुमरकुदर निवासी भुवनेश्वर महतो और उनके सहयोगियों ने फूलों व पारंपरिक सामग्री से उसे आकर्षक ढंग से सजाया. सजी-धजी बैलगाड़ी पूरे समारोह का मुख्य आकर्षण बनी रही. ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे दहेज मुक्त और पारंपरिक विवाह न केवल समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं, बल्कि लोक संस्कृति और पूर्वजों की विरासत को भी जीवंत बनाए रखने का काम करते हैं.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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