ग्रामीण उन्नत स्वच्छता पैमाने में चंद्रपुरा नंबर एक, चास फिसड्डी

बोकारो के ग्रामीण स्वच्छता सर्वेक्षण में चंद्रपुरा प्रखंड अव्वल रहा, जबकि चास प्रखंड का प्रदर्शन सबसे खराब है। जानिए ओडीएफ प्लस मॉडल गांवों की पूरी रिपोर्ट।
बोकारो. जिला के ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता के बुनियादी मामले में प्रदर्शन अच्छा है. जिला में 691 गांव हैं. इनमें से 670 गांव ओडीएफ प्लस गांव घोषित हुआ है. लेकिन ओडीएफ प्लस मॉडल यानी स्वच्छता के उन्नत व परिपक्व चरण में जिला के गांव का प्रदर्शन औसत है. इस पैमाने में 217 गांव ने उपस्थिति दर्ज की है. इनमें से फर्स्ट वैरिफिकेशन में 47 गांव पास हुए हैं. वहीं सेकेंड वैरिफिकेशन में 02 गांव को मंजूरी मिली है.
ओडीएफ प्लस मॉडल मामले में जिला का चंद्रपुरा प्रखंड का प्रर्दशन सबसे अच्छा है, जबकि इस मामले में चास प्रखंड का प्रदर्शन सबसे खराब है. चंद्रपुरा में कुल 31 गांव हैं, इनमें से 14 गांव को ओडीएफ प्लस मॉडल गांव घोषित हुआ है. इनमें से 09 गांव वैरिफाईड हुआ व पहले वैरिफिकेशन में भी 09 गांव को जगह मिली है.
वहीं चास प्रखंड की बात करें तो यहां कुल 138 गांव हैं. इनमें से 18 गांव ओडीएफ प्लस मॉडल गांव घोषित किया गया है. इनमें से 01 गांव भी वैरिफाइड नहीं है. 2026-27 में गति है सुस्त जिला में कुल 691 गांव हैं. इनमें से 670 गांव ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है.
बड़ी बात यह कि यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी इतना ही था. चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में एक भी गांव ओडीएफ प्लस नहीं बना. दूसरी तरफ ओडीएफ प्लस मॉडल गांव की बात करें तो चालू वित्तीय वर्ष में 213 गांव इस श्रृंखला में खड़ी होती है. जबकि, 2025-26 में यह आंकड़ा 2011 था. यानी 03 माह में मात्र 02 गांव ही इस चरण में कदम बढ़ा पाया है. अपशिष्ट प्रबंधन में भी आंकड़ा 670 गांव से आगे नहीं बढ़ पाया है. ड्रैनेज फैसिलिटी का आंकड़ा 934 से बढ़कर 935 हो पाया है.
प्रखंड(कुल गांव)(ओडीएफ मॉडल घोषित गांव) (वैरिफाईड) (फर्स्ट वैरिफिकेशन) चंद्रपुरा31 14 99 पेटरवार64 27 129 कसमार66 21 93 बेरमो 21 15 55 नावाडीह74 32 108 जरीडीह 43 15 44 गोमिया131 36 97 चंदनकियारी123 35 22 चास 138 18 00
ओडीएफ प्लस बुनियादी स्तर है, जिसमें गांव खुले में शौच से मुक्त रहता है. यहां ठोस या तरल कचरा प्रबंधन में से किसी एक की व्यवस्था होनी चाहिए. वहीं ओडीएफ प्लस मॉडल सबसे उन्नत व परिपक्व चरण है. इसमें गांव ओडीएफ स्थिति बनाए रखने के साथ-साथ ठोस व तरल कचरा प्रबंधन दोनों का पूर्ण पालन करना होता है. इसके अतिरिक्त, यहां दृश्य स्वच्छता मसलन, पानी का जमाव न होना, खुले में कचरा व प्लास्टिक का ढेर न होना होना जरूरी है. सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता संदेश प्रदर्शित होने चाहिए. इस कारण ओडीएफ प्लस मॉडल गांव में जरा समय लगता है.
- राम प्रवेश राम, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल (चास) के कार्यपालक अभियंता
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