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Bokaro News : 42 साल से रामनवमी के लिए महावीरी पताका बनाते आ रहे हैं जरीडीह बाजार के मो अजीज

Updated at : 31 Mar 2025 10:27 PM (IST)
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Bokaro News : 42 साल से रामनवमी के लिए महावीरी पताका बनाते आ रहे हैं जरीडीह बाजार के मो अजीज

Bokaro News : जरीडीह बाजार में कपड़ा सिलाई करने वाले मो अजीज पिछले 42 वर्षों से महावीरी पताका बनाते आ रहे हैं

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राकेश वर्मा, बेरमो : बेरमो की प्रसिद्ध व्यवसायिक मंडी जरीडीह बाजार में कपड़ा सिलाई करने वाले मो अजीज पिछले 42 वर्षों से रामनवमी पर्व के अवसर पर महावीरी पताका बनाते आ रहे हैं. उम्र 72 वर्ष पार हो गयी, लेकिन अभी तक काम पर असर नहीं पड़ने दिया. काम में उनके एकलौते पुत्र 40 वर्षीय मोहम्मद नौशाद भी साथ देते चले आ रहे हैं. पिता-पुत्र ऐसा कर सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रहे हैं. मो अजीज का कहना है कि हिन्दू धर्म के सभी भगवानों का वस्त्र बनाता आ रहा हूं. रामनवमी के मौके पर महावीरी पताका, लंगोटा, गमछा, चुनरी के अलावा मुहर्रम का झंडा भी बनाता हूं. इस काम में आंतरिक खुशी की अनुभूति होती है. पहले बाजार में लोग बिहार के गया सहित अन्य जगहों से महावीरी झंडा, लंगोटा व गमछा लाकर बेचते थे. 40 साल पहले मेरे मन में ख्याल आया कि ये सामग्री यहीं बना कर बेची जाये. इसके बाद एक छोटी सी दुकान में रामनवमी पर्व के अवसर पर महावीरी झंडा, लंगोटा व गमछा बनाना शुरू किया. शुरुआत में तो काफी कम महावीरी झंडा बनाते थे. लेकिन धीरे-धीरे मांग बढ़ती गयी. फिलहाल हर साल लगभग ढाई सौ महावीरी झंडा, 20-25 लंगोटा व गमछा की सिलाई कर बेचते हैं. सोमवार को ईद के दिन भी मो अजीज अपनी दुकान में महावीरी पताका, लंगोटा व गमछा बनाने में व्यस्त रहे. कहा कि काफी ऑर्डर है, समय पर नहीं देंगे तो लोगों को रामनवमी में परेशानी होगी. इसलिए समय पर काम पूरा कर रहे हैं.

एक माह पहले से करते हैं तैयारी

रामनवमी के एक माह पहले से ही महावीरी पताका बनाने में पिता-पुत्र दोनों जुट जाते जाते है. मो अजीज का कहना है कि बेरमो में महावीरी पताका बनाने की शुरुआत उनके द्वारा ही की गयी है. इसके बाद बोकारो थर्मल के मो जफर आलम सहित अन्य लोगों ने भी महावीरी पताका बनाना शुरू किया. बेरमो के अलावा नावाडीह, फुसरो, जरीडीह बाजार, कथारा, कुरपनिया, बोकारो थर्मल, गोमिया व ऊपरघाट के लोग भी महावीरी पताका खरीदने आते हैं. कोयलांचल के विभिन्न अखाड़ा समिति के लोग महावीरी पताका बनाने का ऑर्डर पूर्व में ही दे देते हैं. नवरात्र में मां की चुनरी भी बनाते हैं.

40 से लेकर 800 रुपये तक का है महावीरी पताका

मो अजीज कहा कि इस बार 20-25 से लेकर 40 मीटर तक के कई महावीरी पताका बनाये गये हैं. वैसे 40 से लेकर 800 रुपये तक का महावीरी पताका लोग खरीद कर ले जाते हैं. इसके अलावा गमछा व लगोटा 250 से लेकर 300 रुपये तक है. प्रभात खबर से बातचीत में मो अजीज ने कहा कि करीब सौ साल पहले उनके पूर्वज झारखंड के बरही के गोरियाकरमा गांव से जरीडीह बाजार आये थे. दादा लटन खलीफा तथा पिता मो शमशुद्दीन भी सिलाई का काम करते थे. पुत्र मो नौशाद भी इसमें पारंगत हो रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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