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Bokaro News : हड़ताल को लेकर मजदूर संगठनों ने झोंकी ताकत

Updated at : 07 Jul 2025 11:54 PM (IST)
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Bokaro News : हड़ताल को लेकर मजदूर संगठनों ने झोंकी ताकत

Bokaro News : नौ जुलाई को आहूत राष्ट्रव्यापी औद्योगिक हड़ताल की तैयारी को लेकर श्रमिक संगठनों ने पूरी ताकत झोंक दी है.

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बेरमो, नौ जुलाई को आहूत राष्ट्रव्यापी औद्योगिक हड़ताल की तैयारी को लेकर श्रमिक संगठनों ने पूरी ताकत झोंक दी है. प्राइवेट व पब्लिक सेक्टर के मजदूरों से हड़ताल को सफल बनाने की अपील की जा रही है. एक माह से जगह-जगह पिट मीटिंग, आम सभा, ज्वाइंट कन्वेंशन, जनसंपर्क अभियान के माध्यम से हड़ताल की महत्ता से मजदूरों को अवगत कराया जा रहा है. हड़ताल को लेकर पांच मई को रांची में देश के केंद्रीय मजदूर संगठनों का कन्वेंशन हुआ था.

इस हड़ताल में राष्ट्रीय स्तर की 12 मजदूर संगठनों में से भामसं को छोड़ कर अन्य 11 शामिल हैं. इसमें इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एक्टू, एलपीएफ, एआइसीसीटीयू, सेवा, यूटीयूसी, टीयूसीसी, पीयूसीसी आदि हैं. इसके अलावा राज्य स्तर पर क्षेत्रीय व स्वतंत्र यूनियनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है. हड़ताल का असर कोयला, बिजली, रेल, सेल, भेल, स्टील, सीमेंट जैसे उद्योगों के अलावा बैंक, बंदरगाह, इंश्योरेंस सहित कई छोटे-बड़े उद्योगों पर पड़ेगा. हर उद्योग का अपना-अपना एजेंडा है. हड़ताल में कांट्रेक्ट व ट्रांसपोर्ट वर्कर्स भी शामिल रहेंगे. एक दिन की हड़ताल से कोयला उद्योग को दो हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता. कोल इंडिया में लगभग 20-25 लाख टन तथा सीसीएल में डेढ़ से दो लाख लाख टन कोयले का उत्पादन प्रभावित होगा. मालूम हो कि इसके पूर्व 16 फरवरी 2024 को देशव्यापी हड़ताल की गयी थी.

कोयला उद्योग से जुड़ी कई मांगें हैं शामिल

काेयला क्षेत्र के मजदूर संगठनों का कहना है यह हडताल मजदूरों के भविष्य से जुड़ी है. इस हड़ताल में कोयला उद्योग से जुड़ी भी कई मागें शामिल हैं. इसमें आठ लाख सीपीआरएमएस को बढ़ा कर 25 लाख करने, बंद मेडिकल अनफिट चालू करने, आरआर एक्ट 2013 के तहत विस्थापितों को नौकरी व मुआवजा देने, ठेका मजदूरों के लिए हाइ पावर कमेटी की अनुशंसा लागू करने, कोलवीर बहाली पर रोक, शर्तों के आधार पर बहाली पर रोक, एमडीओ व रेवेन्यू शेयरिंग पर कोयला खदान दिये जाने पर रोक आदि शामिल हैं.

1992 से शुरू हुआ था राष्ट्रव्यापी हड़ताल का दौर

देश में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का दौर वर्ष 1992 से शुरू हुआ. अभी तक मजदूर संगठनों ने करीब तीन दर्जन बार देशव्यापी हड़ताल की है. इसके अलावा पूर्व में जेल भरो व सत्याग्रह आंदोलन के तहत देश भर में गिरफ्तारियां दी. रेल रोको-रास्ता रोको आंदोलन किया. संसद के समक्ष तीन बार धरना-प्रदर्शन किया गया. अभी तक की अधिकतम तीन दिन देशव्यापी हड़ताल हुई है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JANAK SINGH CHOUDHARY

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