400 वर्षों से आस्था का केंद्र है जरुवाटांड़ का स्वयंभू बूढ़ा बाबा धाम, मनोकामना पूर्ण होने की है मान्यता

जरुवाटांड़ का स्वयंभू बूढ़ा बाबा धाम | Prabhat Khabar Network
झारखंड के जरुवाटांड़ स्थित 400 साल पुराने स्वयंभू बूढ़ा बाबा धाम की महिमा और इतिहास जानें. यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है.
ब्रह्मदेव दुबे, पिंड्राजोरा
बांग्ला पंचांग के अनुसार सोमवार, 27 जुलाई को सावन का दूसरा सोमवार है. ऐसे में क्षेत्र के श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए विभिन्न शिवालयों में पहुंच रहे हैं. चास प्रखंड की नारायणपुर पंचायत स्थित जरुवाटांड़ बूढ़ा बाबा धाम क्षेत्र के प्रमुख प्राचीन शिवधामों में से एक है. सावन शुरू होते ही प्रत्येक सोमवार यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है. पूजा-अर्चना को लेकर ट्रस्ट की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. श्रद्धालुओं के ठहरने की भी व्यवस्था की गई है.
जनश्रुति के अनुसार, यहां भगवान भोलेनाथ स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पृथ्वी से प्रकट हुए थे. ग्रामीणों की मान्यता है कि यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है और यहां भगवान शिव स्वयंभू रूप में विराजमान हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य स्वीकार होती है. यही कारण है कि दूर-दराज से बड़ी संख्या में लोग बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं.
जरुवाटांड़ बूढ़ा बाबा धाम का इतिहास 17वीं सदी से जुड़ा बताया जाता है. मान्यता है कि एक लोहार ने शिवलिंग को साधारण पत्थर समझकर उस पर अपने औजार की धार तेज करनी शुरू कर दी. लगातार रगड़ लगने पर शिवलिंग से अचानक दूध की धारा फूट पड़ी. यह दृश्य देखकर लोहार सहित आसपास के लोग आश्चर्यचकित रह गए. कहा जाता है कि दूध की धारा इतनी तेज थी कि सामने स्थित तालाब कुछ ही देर में भर गया. इस तालाब को आज भी दूधी गोड़िया के नाम से जाना जाता है.
इस चमत्कार की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई. कुछ समय बाद काशीपुर के राजा को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि वे शिवलिंग के रूप में यहां स्वयं प्रकट हुए हैं. इसके बाद राजा ने बनारस से विद्वान पंडितों को बुलाकर विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कराई. साथ ही मंदिर की नियमित सेवा-पूजा के लिए तिवारी परिवार के पूर्वजों को भूमि और अन्य व्यवस्थाएं उपलब्ध कराईं. तभी से यहां निरंतर भगवान शिव की पूजा-अर्चना होती आ रही है.
लगभग 45 वर्ष पूर्व स्वर्गीय वृंदावन तिवारी के नेतृत्व में तिवारी परिवार ने स्थानीय लोगों के सहयोग से वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया. आज भी मंदिर की देखरेख और पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी तिवारी परिवार निभा रहा है.
जरुवाटांड़ बूढ़ा बाबा धाम वेलफेयर न्यास समिति के अध्यक्ष मनोरंजन तिवारी तथा मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद तिवारी, वनमाली तिवारी, महावीर तिवारी, सुनील तिवारी, सुदाम तिवारी, दुर्गा दास, गिरिजा प्रसाद तिवारी, बलदेव तिवारी, निवारण चंद्र तिवारी, कालिदास तिवारी और मनोज कुमार तिवारी ने बताया कि बाबा के दरबार में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मनोकामना लेकर आता है, उसकी इच्छा अवश्य पूर्ण होती है. प्रत्येक सोमवार यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.
ट्रस्ट के अनुसार, महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जाता है, जिसमें क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर-दूर से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. वर्षों पुरानी आस्था, चमत्कार से जुड़ी मान्यताएं और भक्तों का अटूट विश्वास आज भी जरुवाटांड़ बूढ़ा बाबा धाम की सबसे बड़ी पहचान है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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