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Jharkhand News: झारखंड का गोमिया ऐसे बन सकता है इंडस्ट्रियल हब, रोजगार व विकास से उग्रवाद पर लगेगा अंकुश

Updated at : 03 Sep 2022 4:31 PM (IST)
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Jharkhand News: झारखंड का गोमिया ऐसे बन सकता है इंडस्ट्रियल हब, रोजगार व विकास से उग्रवाद पर लगेगा अंकुश

Jharkhand News : बोकारो के गोमिया प्रखंड में झारखंड का इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) हब बनने की संभावना है, बशर्ते सीसीएल की लंबित परियोजना संचालित हो. विडंबना है कि चिह्नित परियोजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं. इन परियोजनाओं के चालू होने से विकास को गति तो मिलेगी ही, रोजगार के द्वार भी खुलेंगे.

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Jharkhand News : बोकारो के गोमिया प्रखंड में झारखंड का इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) हब बनने की संभावना है, बशर्ते सीसीएल की लंबित परियोजना संचालित हो. विडंबना है कि चिह्नित परियोजनाएं वर्षों से अधर में लटकी हुई हैं. इन परियोजनाओं के चालू होने से क्षेत्र में विकास को गति तो मिलेगी ही, हजारों के लिए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे. इसी के साथ उग्रवाद भी मिटेगा. गोमिया में पूर्व से बारूद फैक्ट्री ओरिका, सीसीएल की स्वांग कोलियरी और स्वांग वाशरी, 420 मेगावाट विद्युत परियोजना टीटीपीएस, तेनुघाट डैम के अलावा ओएनजीसी का प्लांट स्थापित है. ओएनजीसी के आगामी दिसंबर से चालू होने की बात कही जा रही है.

इन छह परियोजनाओं से बदल जायेगी तस्वीर

रजरप्पा फेज 2

महुआटांड़ थानांतर्गत सीसीएल की फेज टू परियोजना 15 वर्षों से लंबित है. परियोजना आउटसोर्सिंग में संचालित होग. संचालन के लिए प्राइवेट कपंनी को आवंटित कर दिया गया है. विस्थापितों का भूमि सत्यापन, नियोजन, पुनर्वास, मुआवजा आदि कारणों से परियोजनाएं लंबित हैं. रजरप्पा वाशरी का भविष्य इसी पर टिका है.

बसतपुर-कोतरे

पचमो पंचायत की बसतपुर-कोतरे परियोजना भी 15 वर्षों से विस्थापन, नियोजन आदि कारणों से लंबित है. आउटसोर्सिंग के तहत संचालन के लिए कपंनी को आंवटित किया जा चुका है. परियोजना संचालन के सतत प्रयास चल रहा है. रैयतों के साथ बैठकें भी चल रही हैं.

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पिपराडीह कोलियरी

सीसीएल कथारा प्रक्षेत्र अंतर्गत स्वांग कोलियरी के निकट बंद पिपराडीह कोलियरी भी 20 वर्षों से बंद है. उक्त बंद कोलियरी के संचालन के लिए सीसीएल प्रबंधन की ओर से गंभीरता से पहल नहीं हो रही है. उक्त बंद पड़ी कोलियरी के क्षेत्र में लगभग 50 मिलियन टन कोयले का भंडार है.

जगेश्वर खास कोलियरी

जगेश्वर खास कोलियरी आउटसोर्सिंग के तहत चालू करने के लिए एक वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने आंवटित कर दिया है. कंपनी ने सर्वे किया, पर आगे का कार्य बंद है, जबकि जगेश्वर खास कोलियरी क्षेत्र में 87 मिलियन टन कोयला है. परियोजना चालू करने के लिए फिलहाल कोई पहल नहीं दिख रही है.

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लालगढ़ प्रोजेक्ट

तिलैया पंचायत के लालगढ़ क्षेत्र की चिह्नित परियोजना में लगभग 29 मिलियन टन कोयला छिपा है. कोयला निकासी के लिए सरकार ने आधुनिक कंपनी को आवंटित कर दिया है. कंपनी चिह्नित क्षेत्र में सर्वे करा रही है. भूमि भी चिह्नित कर ली गयी है, पर सरकार की सहमति के अभाव में प्राइवेट स्तर से सर्वे कर भूमि चिह्नित की गयी है.

लुगू पावर प्लांट

लुगू पहाड़ की तलहटी में केंद्र सरकार द्वारा डीवीसी के जरिये 15 सौ मेगावाट क्षमता की परियोजना पंप प्रेशर प्लांट से विद्युत उत्पादन होना है. इसके लिए सर्वे जारी है. परियोजना स्थापित होने पर 87 प्रतिशत वन भूमि और 13 प्रतिशत भूमि चिह्नित है. परियोजना के आने पर क्षेत्र के धार्मिक स्थल के प्रभावित होने के अंदेशे से विरोध किया जा रहा है, पर प्रबंधन का आश्वासन है कि ऐसा कुछ नहीं होगा. न पर्यावरण असुरक्षित होगा और न ही आस्था को चोट पहुंचेगी.

रिपोर्ट : नागेश्वर, ललपनिया, बोकारो

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