Bokaro News: दो क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य, अब तक सिर्फ 38 हजार क्विंटल की हुई खरीद

Published at :10 Feb 2025 12:37 AM (IST)
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Bokaro News: दो क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य, अब तक सिर्फ 38 हजार क्विंटल की हुई खरीद

Bokaro News: जिले में इस साल दो लाख क्विंटल धान खीदी का ल्क्ष्य निर्धारित किया गया है. लेकिन बोकारो के जिम्मेदार अधिकारी धान खरीदी के लक्ष्य को पूरा करने को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं. 2024-25 में दो लाख क्विंटल के लक्ष्य के विरुद्ध अभी तक महज 38 हजार 658 क्विंटल धान खरीदी की गयी है.

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पिछले चाल सालों का रिकॉर्ड देखें तो बोकारो जिला धान खरीदी के लक्ष्य को प्राप्त करने में विफरल रहा है. लक्ष्य पूरा करने की बात तो दूर, एक साल (2021-22) को छोड़ दें तो जिला निर्धारित लक्ष्य के आसपास भी नहीं भटका है.

2021-22 में पहुंचे थे लक्ष्य के करीब

बता दें कि साल 2021-22 में भी जिले को दो लाख क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य मिला था. उक्त वित्तीय वर्ष में जिले ने लक्ष्य के विरूद्ध एक लाख 94 हजार क्विंटल धान की खरीदारी की थी. 2021-22 में बोकारो ने 97 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य प्राप्त किया था. इसके बाद बोकारो की स्थिति लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में बद से बदत्तर हो गयी.

31 मार्च है धान खरीद की अंतिम तिथि

विदित हो कि बोकारो जिले में इस साल धान की खरीद को लेकर 7127 किसान रजिस्टर्ड किये गये, जबकि 11678 को एमएमएस भेजा गया है. 791 किसान धान बिक्री के लिए टर्न आउट हुए हैं. बेचे गये धान के बदले नौ करोड़ 27 लाख 81 हजार 247.20 रुपये का पेमेंट जनरेट किया गया है.

तीन करोड़ 51लाख 32 हजर 434.45 रुपये का पेमेंट धान खरीद के बदले किया गया है. जिले में धान की खरीदारी के लिए चार मिलों को टैग किया गया है. खरीदारी की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित है. माना जाता है कि बसंत पंचमी के बाद धान बिक्री का दर बहुत कम हो जाती है.

किस्तों में भुगतान से बचते हैं किसान

बोकारो जिले में 33 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है. 2024 में अच्छे मानसून का साथ मिला. बावजूद इसके जिला धान खरीद के लक्ष्य से पिछड़ रहा है. जानकार बताते हैं कि किसान किसी प्रकार की उलझन नहीं चाहते. इसीलिए विभागीय लेट-लतीफी से किसान बचना चाहते हैं.

रजिस्ट्रेशन से लेकर धान की बिक्री के प्रोसेस में किसान को परेशानी होती है. यही नहीं, धान बिक्री के बाद किस्त में राशि का भुगतान होता है. वहीं अन्य स्रोतों से धान की बिक्री करने पर एकमुश्त राशि मिलती है. खलिहान से धान की बिक्री सीधे हो जाती है. जबकि, विभागीय बिक्री में पैक्स तक धान लाने की जिम्मेदारी किसानों की होती है.

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