Bokaro News : पर्यावरण प्रदूषण वैश्विक चिंता का विषय बन गया है : राज्यपाल

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Bokaro News : पर्यावरण प्रदूषण वैश्विक चिंता का विषय बन गया है : राज्यपाल

Bokaro News : देवनद दामोदर महोत्सव में शामिल हुए राज्यपाल संतोष गंगवार, की गंगा आरती, बोकारो के तेलमच्चो पुल के पास दामोदर तट पर हुआ कार्यक्रम.

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चास, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दामोदर केवल एक नदी नहीं, बल्कि झारखंड की जीवनरेखा है. इसने वर्षों से इस क्षेत्र की औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को आधार दिया है. यह एक दुर्लभ संयोग है कि आज हम पर्यावरण के वैश्विक सरोकार और अपनी सनातन परंपरा गंगा अवतरण, दोनों को एक साथ मना रहे हैं. प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध झारखंड में नदियों, वनों और पर्वतों का संरक्षण केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है. श्री गंगवार गुरुवार को बोकारो के तेलमच्चो पुल के पास दामोदर नदी के तट पर आयोजित देवनद दामोदर महोत्सव-2025 में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. इससे पूर्व उन्होंने दीप जलाकर महोत्सव का उद्घाटन किया. इस अवसर पर राज्यपाल ने गंगा आरती भी की. राज्यपाल ने उपस्थित जनसमुदाय को विश्व पर्यावरण दिवस और गंगा दशहरा की शुभकामनाएं दी. कहा कि आज जब विश्व पर्यावरण दिवस के साथ हम भारतीय अपनी सनातन परंपरा के अनुरूप गंगा अवतरण को भी स्मरण कर रहे हैं, यह दिवस प्रकृति और परंपरा दोनों के प्रति हमारे दायित्वों की याद दिलाता है. राज्यपाल श्री गंगवार ने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण आज एक वैश्विक चिंता का विषय बन गया है. यह विचारणीय है कि हम किस प्रकार विकास की राह पर अग्रसर होते हुए प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाये रखें. कहा कि झारखंड प्राकृतिक संपदा से भरपूर राज्य है. यहां के वन, पर्वत, जलप्रपात और नदियां केवल दृश्य सौंदर्य नहीं, बल्कि जीवनदायिनी हैं. इनका संरक्षण हमारा नैतिक और सामाजिक दायित्व है.

नदियों की स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी

राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि देवनद दामोदर महोत्सव न केवल हमारी सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, बल्कि यह पर्यावरणीय जागरूकता का भी सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि बोकारो स्टील प्लांट, चंद्रपुरा व तेनुघाट थर्मल पावर स्टेशन जैसे अनेक प्रतिष्ठान दामोदर के किनारे स्थापित हैं, पर औद्योगिक विकास की दौड़ में दामोदर नद को भारी प्रदूषण का भी सामना करना पड़ा. युगांतर भारती ने एक प्रभावी पहल की और प्रदूषण इकाइयों पर दबाव बनाकर प्रशासन को सजग किया. इसके चलते अब दामोदर का जल कई स्थानों पर साफ दिखाई देने लगा है. नदियों की स्वच्छता केवल शासन या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है.

दामाेदर की पूजा प्रकृति के प्रति आस्था व संरक्षण का संकल्प

श्री गंगवार ने कहा कि भारत में नदियां केवल जलस्रोत नहीं हैं, वे पूजनीय हैं. दामोदर स्वयं भगवान विष्णु का नाम है. इस महोत्सव के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि नदियों की पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है. यहां दामोदर की पूजा सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति आस्था और संरक्षण का संकल्प है.

प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना जरूरी

राज्यपाल श्री गंगवार ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना जरूरी है. हमें अपने दैनिक जीवन में पॉलीथिन और सिंगल यूज प्लास्टिक से बचना होगा और इसके स्थान पर जूट, कपड़े व पुनः उपयोग योग्य वस्तुओं का प्रयोग बढ़ाना होगा. राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालय परिसरों और सार्वजनिक स्थलों को नो प्लास्टिक जोन घोषित किया जाए, ताकि आनेवाली पीढ़ियां एक स्वच्छ वातावरण में सांस ले सकें.

आंदोलन से सुधरी दामोदर की स्थिति : सरयू राय

जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने अपने संबोधन में कहा कि दामोदर बचाव आंदोलन व आमजनों के सहयोग से दामोदर नद की स्थिति सुधरी है. 200 किमी लंबे दामोदर नद के किनारे कई उद्योग और कारखाने बसे हैं. सालों पहले इन कारखानों के गंदे पानी से नदी दूषित हो रही थी. लेकिन आज दृश्य बदल रहा है. कहा कि बोकारो में लगभग 45 जगह दामोदर महोत्सव मनाया जाता है. श्री राय ने कहा कि तेलमच्चो तट सहित सभी जगहों को लोगों की सुविधा के लिए विकसित करना जरूरी है.

प्रकृति का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य : श्वेता सिंह

बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है. दामोदर हमारी पहचान है. इसको साफ रखना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है. दामोदर तट को विकसित करने के लिए हर संभव प्रयास करूंगी. दामोदर नदी के चलते पूरे चास की प्यास बुझ रही है. दामोदर नदी को स्वच्छ रखना बहुत जरूरी है. इससे पहले झारखंड सांस्कृतिक परंपरा के साथ आदिवासी नृत्य व घोड़ा नाच से राज्यपाल का स्वागत किया गया. महोत्सव में चास-बोकारो के विभिन्न पार्टी के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता सहित दर्जनों गांवों के ग्रामीण शामिल हुए.

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Anand Kumar Upadhyay

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