बोकारो के बड़कीपुन्नू में हाथियों का आतंक, तीन बुजुर्गों की मौत

बोकारो के बड़कीपन्नू गांव में हाथियों का आतंक. एआई जेनरेटेड फोटो
Bokaro News: बोकारो के गोमिया प्रखंड में बड़कीपुन्नू गांव में हाथियों के हमले से तीन बुजुर्गों की मौत हो गई. एक महिला गंभीर रूप से घायल है. महुआटांड़ क्षेत्र में हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है. बीते तीन महीनों में आठ लोगों की जान जा चुकी है. पूरी खबर नीचे पढ़ें.
महुआटांड़ से रामदुलार पंडा की रिपोर्ट
Bokaro News: झारखंड के बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड अंतर्गत महुआटांड़ क्षेत्र में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. गुरुवार की अहले भोर हाथियों के झुंड ने बड़कीपुन्नू गांव में तांडव मचाते हुए तीन बुजुर्गों को कुचलकर मार डाला. इस हृदयविदारक घटना से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है.
तड़के भोर हुआ हमला, नींद में मौत
घटना गुरुवार सुबह करीब तीन बजकर बीस मिनट की बताई जा रही है. हाथियों का झुंड बड़कीपुन्नू के करमाली टोला में घुस आया. गांव के लोग गहरी नींद में थे. अचानक हाथियों ने घरों पर हमला शुरू कर दिया. गंगा करमाली(65) और उनकी पत्नी कमली देवी(62) घर के अंदर सो रहे थे. हाथियों ने पहले घर को क्षतिग्रस्त किया और फिर गंगा करमाली को पटककर कुचल दिया, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई.
पत्नी और गोतनी की भी गई जान
पति पर हुए हमले की आवाज सुनकर कमली देवी नींद से जागी और जान बचाने के लिए बाहर निकलने की कोशिश की. लेकिन हाथियों ने उन्हें भी पकड़ लिया और पटककर कुचल दिया, जिससे उनकी भी मौके पर ही मौत हो गई. इसी दौरान हाथियों ने ठीक बगल के घर में भी हमला किया. वहां रह रहीं कमली देवी की बड़ी गोतनी भगिया देवी(65), पति गणेश करमाली, को भी हाथियों ने कुचलकर मार डाला.
एक महिला गंभीर रूप से घायल
इस हमले में रितु करमाली की पत्नी करमी देवी(50) गंभीर रूप से घायल हो गई हैं. हाथियों ने उन्हें भी पटक दिया, लेकिन किसी तरह उनकी जान बच गई. ग्रामीणों की मदद से उन्हें आनन-फानन में अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.
गांव में पसरा मातम, दहशत का माहौल
एक ही रात में तीन बुजुर्गों की मौत से बड़कीपुन्नू गांव में मातम छा गया है. ग्रामीण भय और आक्रोश में हैं. लोगों का कहना है कि हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, लेकिन वन विभाग द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है. रात होते ही लोग घरों से बाहर निकलने से डरने लगे हैं.
तीन महीनों में आठ लोगों की गई जान
महुआटांड़ और आसपास के इलाकों में पिछले करीब तीन महीनों में हाथी हमले में आठ लोगों की मौत हो चुकी है. दस नवंबर की रात तिलैया रेलवे अंडरपास के पास पूर्व मुखिया बालेश्वर महतो के पुत्र प्रकाश कुमार महतो और टूनक महतो के पुत्र चरकू महतो की मौत हो गई थी. 16 नवंबर की रात सांझो देवी नामक महिला को हाथियों ने कुचल दिया था. वहीं, हाल ही में सिमराबेड़ा में सब्जी विक्रेता रवींद्र दांगी की भी जान गई.
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दर्जनों गांवों में भारी नुकसान
हाथियों के उत्पात से तिरला, होन्हें, कंडेर, बारीडारी, बड़कीपुन्नू, महुआटांड़, टीकाहारा, केंदुआ, चोरगांवां, कुंदा, खखंडा और मुरपा सहित करीब ढाई दर्जन गांव और टोलों में भारी नुकसान हुआ है. हाथियों ने घर, चहारदीवारी, वाहन और फसलों को नुकसान पहुंचाया है. ग्रामीणों ने वन विभाग से स्थायी समाधान और मुआवजे की मांग की है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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