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Bokaro News: खदानों के विस्तारीकरण के बाद मिलेगा 400 मिलियन टन कोयला

Updated at : 25 Nov 2025 10:48 PM (IST)
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Bokaro News: खदानों के विस्तारीकरण के बाद मिलेगा 400 मिलियन टन कोयला

Bokaro News: बेरमो कोयलांचल में सीसीएल के तीनों एरिया ढोरी, बीएंडके व कथारा एरिया की कई खदानों का विस्तार होने के बाद लगभग 400 मिलियन टन कोयला सीसीएल को मिलेगा.

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कई प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सीसीएल बोर्ड से अप्रूवल मिल गया तो कई इंतजार में है. कई खदानों का पीआर बनाने का कार्य अंतिम चरण में है. कई माइंस का इनवायरमेंट क्लीयरेंस भी लेना है. कई खदानों के विस्तार में शिफ्टिंग समस्या है.

अमलो परियोजना की ऑरिजनल पीआर सालाना पांच मिलियन टन का

ढोरी एरिया के एएओडीसीएम (अमलो परियोजना) की ऑरिजनल पीआर सालाना पांच मिलियन टन की बनायी गयी है. यहां 100 मिलियन टन कोल रिजर्व है. इसमें पहले 15 मिलियन टन कोयला निकाला जा चुका है. वित्तीय वर्ष 2024-25 में यहां से 36 लाख टन तथा 2025-26 में 50 लाख टन कोल प्रोडक्शन किया जायेगा. फिलहाल अमलो माइंस सालाना तीन मिलियन टन की है. इस वर्ष इसे बढ़ा कर 3.6 मिलियन का किया जायेगा.

अमलो में हाइवॉल माइनिंग से होगा 13 लाख टन उत्पादन

अमलो में सीसीएल की पहला हाइवाल माइनिंग करने की दिशा में तेज गति से काम चल रहा है. इससे तीन साल में 13 लाख टन कोयला का उत्पादन होगा होगा. पहले साल तीन लाख टन तथा इसके बाद के वर्षों में सालाना पांच-पांच लाख टन उत्पादन होगा.

एसडीओसीएम में आयेगा 35 मिलियन टन का नया प्रोजेक्ट

एसडीओसीएम में 35 मिलियन टन का नया प्रोजेक्ट आयेगा, जो करीब 20 साल का होगा. फिलहाल यहां 756 हेक्टेयर की पीआर बन रही है, जो अंतिम चरण में है. इस वर्ष बोर्ड से इसका अप्रूवल मिल जायेगा. इसमें 46 मिलियन टन वाशरी ग्रेड-3 तथा जी-9 का कोल रिजर्व है.

बंद पिछरी माइंस को चालू करने पर 27 लाख टन कोयला

बंद पिछरी माइंस को चालू करने के लिए आउटसोर्स का प्रपोजल बनाया जा रहा है. फॉरेस्ट व रैयती मिला कर कुल 358 एकड़ जमीन में 98.4 एकड़ का एक पैच जो रैयती है उसमें 50 एकड से ज्यादा जमीन का सत्यापन का कार्य हो चुका है. शेष जमीन का सत्पायन कार्य जारी है.

15 मिलियन टन से ज्यादा कोयला है बंद अंगवाली माइंस में

वर्षों से बंद अंगवाली माइंस को भी चालू करने के लिए पीआर बनायी जा रही है. इसमें भी फिलहाल छोटे पैच से उत्पादन शुरू होगा. इस माइंस में 18 लाख टन कोयला तथा करीब 30 लाख घन मीटर टन ओबी है. प्रबंधन के अनुसार ऐसे पूरे माइंस में जियोलॉजिकल रिपोर्ट के अनुसार कुल कोल रिजर्व 15 मिलियन टन से ज्यादा है, जो 85 हेक्टेयर में है. यहां जिस जमीन पर कोयला खनन किया जाना है, उस पर विस्थापन समस्या नहीं है.

कारो बस्ती की शिफ्टिंग के बाद मिलेगा 40 मिलियन टन कोयला

कारो बस्ती के शिफ्ट हो जाने के बाद यहां से लगभग 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. कारो परियोजना के क्वायरी-टू में करीब 60 मिलियन टन कोल रिजर्व है. यह पूरा एरिया फोरेस्ट लैंड है.

बरवाबेड़ा गांव की शिफ्टिंग के बाद मिलेगा 40 मिलियन टन कोयला

मेगा एकेके प्रोजेक्ट को बरवाबेड़ा गांव के शिफ्टिंग के बाद यहां के भू-गर्भ से करीब 40 मिलियन टन कोयला मिलेगा. सालाना सात से लेकर 11 मिलियन टन कोयला सात साल तक खनन किया जा सकेगा. एकेके परियोजना का कोल रिजर्व मार्च 2021 की प्रोजेक्ट रिपोर्ट के अनुसार 87.04 मिलियन टन है.

बोकारो कोलियरी में 21 मिलियन टन कोयला खनन को लेकर पीआर अप्रूव

बोकारो कोलियरी को लॉन्ग टर्म आउटसोर्स से चलाने को लेकर 15 साल की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनायी गयी है. 84 मिलियन घन मीटर टन ओबी निस्तारण के बाद 21 मिलियन टन कोयला मिलेगा. हर साल दो मिलियन (20 लाख टन) कोयला उत्पादन किया जायेगा. कुछ दिन पहले ही सीसीएल बोर्ड में इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट को अप्रूवल मिला है.

कथारा एरिया

स्वांग-गोविंदपुर परियोजना के विस्तार के लिए मोटिंको नाला को शिफ्ट किया गया है. इसके बाद इस परियोजना का भविष्य 15 साल तक के लिए सुरक्षित हो गया. यहां करीब 22 मिलियन टन कोयला है. हर साल से 25 लाख टन कोयला खनन होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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MAYANK TIWARI

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By MAYANK TIWARI

MAYANK TIWARI is a contributor at Prabhat Khabar.

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