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देश में औद्योगिक विकास के लिए सेल ने दिया सुदृढ़ आधार

24 जनवरी को सेल का स्थापना दिवस 1978 में सेल का पुनर्गठन किया गया, इसे एक परिचालन कंपनी बनाया गया बोकारो : 70 के दशक में इस्पात व खान मंत्रालय ने उद्योग के प्रबंधन के लिए एक नया मॉडल तैयार करने के के लिए नीतिगत वक्तव्य तैयार किया. दो दिसंबर 1972 को यह नीति वक्तव्य […]

24 जनवरी को सेल का स्थापना दिवस

1978 में सेल का पुनर्गठन किया गया, इसे एक परिचालन कंपनी बनाया गया

बोकारो : 70 के दशक में इस्पात व खान मंत्रालय ने उद्योग के प्रबंधन के लिए एक नया मॉडल तैयार करने के के लिए नीतिगत वक्तव्य तैयार किया. दो दिसंबर 1972 को यह नीति वक्तव्य संसद में पेश किया गया. इसके आधार पर कच्चे माल व उत्पादन का कार्य एक ही के अधीन लाने के लिए धारक कंपनी के सिद्धांत को आधार बनाया गया. परिणाम स्वरूप, स्टील ऑथिरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का गठन किया गया.

24 जनवरी 1973 को निगमित इस कंपनी की अधिकृत पूंजी 2000 करोड़ रुपये थी. सेल को भिलाई, बोकारो, दुर्गापुर, राउरकेला व बर्नपुर में पांच एकीकृत इस्पात कारखाने, दुर्गापुर स्थित मिश्र इस्पात कारखाना व सेलम इस्पात कारखाने के लिए उत्तरदायी बनाया गया.

1978 में सेल का पुनर्गठन किया गया. इसे एक परिचालन कंपनी बनाया गया. अपने गठन के बाद से ही सेल देश में औद्योगिक विकास के लिए एक सुदृढ़ आधार तैयार करने में सहायक सिद्ध हुई है.

19 जनवरी 1954 को हिन्दुस्तान स्टील प्रा. लि. की स्थापना : सेल का आरंभ एक स्वाधीन राष्ट्र के उदय के साथ हुआ. स्वाधीनता मिलने के बाद राष्ट्र निर्माताओं ने देश के तीव्र औद्योगिकीकरण के लिए आधारभूत सुविधाएं जुटाने की परिकल्पना की. इस्पात क्षेत्र को आर्थिक विकास का साधन माना गया. 19 जनवरी 1954 को हिन्दुस्तान स्टील प्रा. लि. की स्थापना की गयी. शुरू में हिन्दुस्तान स्टील (एचएसएल) को राउरकेला में लगाये जा रहे एक इस्पात कारखाने का प्रबंध करने के लिए गठित किया गया था.

अप्रैल 1957 में भिलाई व दुर्गापुर का नियंत्रण हिन्दुस्तान स्टील को : भिलाई व दुर्गापुर इस्पात कारखानों के लिए प्राथमिक कार्य लोहे और इस्पात मंत्रालय ने किया था. अप्रैल 1957 में इन दो इस्पात कारखानों का नियंत्रण व कार्य की देखरेख भी हिन्दुस्तान स्टील को सौंप दिया गया. हिन्दुस्तान स्टील का पंजीकृत कार्यालय शुरू में नयी दिल्ली में था. 1956 में इसे कलकत्ता और 1959 में रांची ले जाया गया. भिलाई व राउरकेला इस्पात कारखानों की दस लाख टन क्षमता का चरण दिसंबर 1961 में पूरा किया गया.

Prabhat Khabar Digital Desk
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