चास : जमीन मापी कराने पहुंचे पुलिस पर ग्रामीणों ने किया पथराव, लाठीचार्ज
Updated at : 22 Feb 2019 5:53 AM (IST)
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चास : भवानीपुर मौजा में गुुरुवार को मापी कर जमीन चिह्नित कराने पहुंचीं चास सीओ वंदना सेजवलकर को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा. मापी नहीं कराने देने व हंगामा करने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. दूसरे दावेदारों का विरोध बढ़ता देख जमीन की मापी नहीं हो सकी. ग्रामीणों के साथ प्रशासनिक […]
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चास : भवानीपुर मौजा में गुुरुवार को मापी कर जमीन चिह्नित कराने पहुंचीं चास सीओ वंदना सेजवलकर को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा. मापी नहीं कराने देने व हंगामा करने पर पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा. दूसरे दावेदारों का विरोध बढ़ता देख जमीन की मापी नहीं हो सकी. ग्रामीणों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों व पुलिस कर्मियों के बीच जमकर झड़प हुई. ग्रामीणों की ओर से जहां पत्थरबाजी की गयी, वहीं पुलिस की ओर से लाठी चार्ज कर ग्रामीणों को भगाया गया.
68 एकड़ 95 डिसमिल जमीन पर है विवाद, कई बता रहे अपने को दावेदार
गौरतलब है कि भवानीपुर मौजा में 68 एकड़ 95 डिसमिल जमीन का विवाद काफी दिनों से चल रहा है. इसका खाता नंबर 13 व प्लाॅट नंबर 822, 73 व अन्य है. इस जमीन पर रामधन महतो, धनंजय महतो के वंशजों द्वारा दावा किया जा रहा है. जबकि मीना बनर्जी, कविता बनर्जी व सौदागर परिवार की ओर से भी इस जमीन पर दावेदारी पेश की जा रही है.
इस मामले में मीना बनर्जी व कविता बनर्जी के आवेदन पर बोकारो डीसी डॉ शैलेस कुमार चौरसिया ने कार्यपालक दंडाधिकारी प्रभाष दत्ता को दंडाधिकारी नियुक्त कर जमीन की मापी कर रैयतों को चिह्नित करने का दिशा-निर्देश दिया गया था, लेकिन रामधन महतो, धनंजय महतो के परिवार की ओर से विरोध के कारण जमीन की मापी व चिह्नित नहीं हो सकी.
वहीं रामधन महतो, धनंजय महतो के वंशज मथुर चंद्र महतो, राजेंद्र नाथ महतो सहित अन्य ने कहा कि मेरे पूर्वज ने 1926 में इस जमीन की रजिस्ट्री करायी थी. तभी से उक्त जमीन उनके दखल में है. साथ ही रसीद भी कटवाते हैं. उन्होंने बताया इस जमीन पर मीना बनर्जी व कविता बनर्जी की ओर से 2015 में फर्जी कागजात बनाकर दावेदारी की जा रही है. इन्हें प्रशासन भी मदद कर रहा है. ऐसे भी जमीन पर कोर्ट में टाइटल शूट चल रहा है.
सभी मुख्य चौक-चौराहों व वार्ड में लगेंगी 14964 एलइडी स्ट्रीट लाइट
सूख रहा है तालाब
एक समय था जब सहन गड़िया आसपास के लोगों के लिये जीवनदायिनी बना हुआ था. लेकिन अतिक्रमण के कारण तालाब सूख रहा है.
विद्या सागर झरियात
तालाब को बचाने की दिशा में कार्य होना चाहिये. क्षेत्र में जल स्त्रोत बना रहे, इसका ख्याल आम जनता के अलावा अधिकारियों को भी रखनी होगी.
श्यामापद झरियात
कई बार शिकायत के बाद भी जिला प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है. इससे क्षेत्र में कभी भी हंगामा हो सकता है. अतिक्रमण मुक्त किया जाये.
देवाशीष घोष
सरकारी तालाबों की सुरक्षा का जिम्मेवारी प्रशासन की है. लेकिन लोग मिली भगत से तालाब का अतिक्रमण कर रहे हैं.
केशव चंद्र झरियात
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