बोकारो : घोषणा के बाद भी बोकारो कॉलेज नहीं बन सका क्लस्टर विवि, ना मिला प्रीमियर कॉलेज का दर्जा

Updated at : 08 Jan 2019 9:58 AM (IST)
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बोकारो : घोषणा के बाद भी बोकारो कॉलेज नहीं बन सका क्लस्टर विवि, ना मिला प्रीमियर कॉलेज का दर्जा

रंजीत कुमार बोकारो : दो वर्ष पूर्व राज्य सरकार की घोषणा के बाद भी बोकारो स्टील सिटी कॉलेज को क्लस्टर विश्व विद्यालय का दर्जा नहीं मिला और न ही प्रीमियर कॉलेज बनाया गया. विभावि से बीबीएमकेयू में आने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया. क्लस्टर विश्वविद्यालय बनने पर विद्यार्थियों की उम्मीद थी कि […]

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रंजीत कुमार
बोकारो : दो वर्ष पूर्व राज्य सरकार की घोषणा के बाद भी बोकारो स्टील सिटी कॉलेज को क्लस्टर विश्व विद्यालय का दर्जा नहीं मिला और न ही प्रीमियर कॉलेज बनाया गया. विभावि से बीबीएमकेयू में आने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया. क्लस्टर विश्वविद्यालय बनने पर विद्यार्थियों की उम्मीद थी कि उनकी समस्याओं का समाधान त्वरित गति से होता. स्थानीय स्तर पर ही एडमिट कार्ड, अंक पत्र सहित सभी प्रकार के प्रमाण पत्र मिलते. साथ ही आसपास के कॉलेजों की समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर होता.
सरकार को 16 करोड़ का प्रस्ताव : क्लस्टर विश्वविद्यालय व प्रीमियर कॉलेज का दर्जा पाने के लिए बोकारो कॉलेज प्रबंधन ने लगातार एचआरडी व विवि प्रबंधन से पत्राचार किया. कॉलेज ने राज्य सरकार को कला, विज्ञान भवन व प्रयोगशाला के लिए 16 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है. साथ ही पुस्तकालय व लैब आधुनिकीकरण का प्रस्ताव दिया है, परंतु अब तक ऐसा नहीं हुआ. वर्ष 2016 में नैक टीम ने कॉलेज को बी ग्रेड दिया था. ग्रेडिंग भी कॉलेज के काम नहीं आयी.
सुविधा के नाम पर पुरानी व्यवस्था : प्रीमियर कॉलेज के आकांक्षी कॉलेज में आज भी पुरानी व्यवस्था ही कायम है. कैंपस वाई-फाई नहीं है. न ही कक्षा डिजिटल है. अब तक पुस्तकालय का डिजिटलाइजेशन नहीं हुआ है. विद्यार्थियों को लाइब्रेरी से पूरी पुस्तक नहीं मिल रही है. स्नातक की कक्षा भी ठीक से संचालित नहीं हो रही है. स्नातकोत्तर की पढ़ाई भी सभी विषयों में उपलब्ध नहीं है. कक्षा नहीं लेने का मुख्य कारण व्याख्याताओं की कमी है.
: पांच फरवरी 1970 को सेक्टर वन राम मंदिर में बोकारो कॉलेज की स्थापना की गयी थी. विद्यार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार की ओर से कॉलेज को जनवरी 1980 में सेक्टर छह में स्थानांतरित कर दिया गया. कॉलेज को 20 एकड़ भूमि प्रदान की गयी. वर्तमान समय में कॉलेज में लगभग छह हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. स्नातक व स्नातकोत्तर के साथ बीएड की पढ़ाई भी कॉलेज प्रांगण में जारी है.
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