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तीन हजार विद्यार्थियों की सुरक्षा राम भरोसे

Updated at : 25 Aug 2018 7:50 AM (IST)
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तीन हजार विद्यार्थियों की सुरक्षा राम भरोसे

बोकारो : रामरुद्र +2 उच्च विद्यालय, चास. बोकारो-चास का उत्कृष्ट माना जाने वाला सरकारी स्कूल. एकेडमिक रिजल्ट के साथ-साथ अन्य प्रकोष्ठ में भी विद्यार्थी का प्रदर्शन राज्य स्तरीय होता है. बावजूद इसके सरकार स्कूल के प्रति जवाबदेह नजर नहीं आ रही है. नजरअंदाज की हद यह कि राहगीरों ने स्कूल को आम रास्ता बना दिया […]

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बोकारो : रामरुद्र +2 उच्च विद्यालय, चास. बोकारो-चास का उत्कृष्ट माना जाने वाला सरकारी स्कूल. एकेडमिक रिजल्ट के साथ-साथ अन्य प्रकोष्ठ में भी विद्यार्थी का प्रदर्शन राज्य स्तरीय होता है. बावजूद इसके सरकार स्कूल के प्रति जवाबदेह नजर नहीं आ रही है. नजरअंदाज की हद यह कि राहगीरों ने स्कूल को आम रास्ता बना दिया हैं.
दरअसल, पिछले साल नेशनल हाइवे चौड़ीकरण के कारण स्कूल की बाउंड्री तोड़ दी गयी थी. इसके बाद धीरे-धीरे लोग स्कूल का इस्तेमाल खुले क्षेत्र के रूप में करने लगे. सड़क के जाम होने पर स्थिति भयावह हो जाती है. इससे तीन हजार से अधिक विद्यार्थी की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो रहा है.
टूटी बाउंड्री के कारण लोग स्कूल ग्राउंड से होकर गुजरते हैं. इस पर रोक लगाने के लिए स्कूल प्रबंधन मुख्य द्वार को बंद कर देता है. लोगों को बकायदे संवाद स्थापित कर समझाया जाता है. कुछ लोगों पर इसका असर भी हुआ. लेकिन, ज्यादातर लोगों पर कुछ असर नहीं हुआ. हद तो तब हो जाती है, जब मुख्य द्वार के बंद होने पर भी लोग जबरदस्ती करते हैं. मुख्य द्वार के विजिटिंग गेट के चौखट पर ईंट लगा कर लोग बाइक पार करते हैं. लोगों का रवैया ऐसा मानो स्कूल ने शहर को कुछ दिया ही नहीं हो.
आये दिन होती है कहा-सुनी, मामला थाना तक भी पहुंचा : स्कूल परिसर का राहगीरी इस्तेमाल का स्कूल की ओर से आये दिन विरोध किया जाता है. इस दौरान अक्सर कहासुनी भी होती है. कई बार राहगीरों की विद्यार्थियों के साथ भी नोकझोंक हो जाती है. जुलाई माह में बच्चे स्कूल परिसर में क्रिकेट खेल रहे थे, इस दौरान एक बाइक सवार गुजर रहा था, कैच लेने के क्रम में बच्चा बाइक से टकरा गया. इसमें उसको काफी चोट आयी. विवाद बढ़ने के कारण चास थाना को बुलाना पड़ा था. इसके बाद मामला शांत हुआ, लेकिन लोगों की आदत में सुधार नहीं हुआ. स्कूल परिसर का इस्तेमाल करने से लोगों को मात्र 200-300 मीटर दूरी ही कम तय करनी पड़ती है.
टूटी बाउंड्री बना है कारण, फरियाद पर नहीं हो रही सुनवाई
हर स्कूल की शुरूआत सुबह में साफ-सफाई से होती है. रामरुद्र स्कूल की भी शुरूआत कुछ ऐसी ही होती है, अंतर बस इतना यहां सफाई कर्मी व शिक्षक को विद्यार्थी आगमन के पहले बोतल चुनना पड़ता है. कभी बोतल शराब की होती है, तो कभी कफ सिरफ की. ये बोतल रात्रि में कुछ रसूखदार लोग स्कूल परिसर में फेंक देते हैं, या फिर इस्तेमाल कर छोड़ देते हैं. लाइब्रेरी के बाहर की स्थिति हर दिन भयावह होती है.
पूर्व डीसी ने करायी थी चहारदीवारी निर्माण के लिए मापी
बाउंड्री टूटने के बाद प्रभारी प्राचार्या ने जिला शिक्षा पदाधिकारी व डीसी से गुहार लगायी थी. इसके बाद पूर्व डीसी राय महिमापत रे की अगुवाई में निर्माण कार्य की दिशा में पहल की गयी. बकायदे मापी भी की गयी. चास सीओ की ओर से काम आगे बढ़ाया गया. लेकिन, वर्तमान में काम बंद है. विभाग के फेर में निर्माण कार्य रूका हुआ है. नतीजा स्कूल को हर दिन सुरक्षा के साथ समझौता करना पड़ता है. सरकार की गंभीरता ऐसी कि तीन हजार विद्यार्थी की सुरक्षा के लिए एक दीवार तक खड़ी नहीं हो पा रही है.
आम लोगों को आगे आना होगा : प्रभारी प्राचार्या
प्रभारी प्राचार्या नीरज कुमारी ने कहा : लोग जब तक स्कूल को धरोधर नहीं समझेंगे, तब तक स्थिति में सुधार नहीं होगी. आम लोग का सहयोग मिल गया, तो बिना बाउंड्री के भी स्कूल सुरक्षित रहेगी. यदि आम लोगों का साथ नहीं मिला तो बाउंड्री भी बिना काम का साबित होगा. बताया : निर्माण के लिए हर स्तर पर फरियाद की गयी है. समय-समय पर रिमाइंडर भी दिया गया है. बाउंड्री बनने से स्कूल बहुत परेशानी से मुक्त हो जायेगी.
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